अदालत न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने और यौन उत्पीड़न के एक मामले में चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ कथित साज़िश करने वाले फ़िक्सर को ढूंढने के लिए जांच एजेंसियों की मदद लेना चाहती है.
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कारोबारी अनिल अंबानी के अवमानना मामले में हेरफ़ेर करने के आरोप में अदालत के ही दो कर्मचारियों को बर्ख़ास्त करने की ख़बर पर भी चिंता ज़ाहिर की.
इस मद्देनज़र जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ़ नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की स्पेशल बेंच ने सीबीआई, आईबी और दिल्ली पुलिस के प्रमुख के साथ बुधवार को बंद कमरे में बैठक की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में शुक्रवार को नामांकन से पहले रोड शो करेंगे.
इसके बाद 26 अप्रैल यानी शुक्रवार को वो नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री का रोड शो छह किलोमीटर लंबा होगा. वाराणसी आने के बाद प्रधानमंत्री का रोड शो लंका स्थित महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ शुरू होगा.
इसके बाद प्रधानमंत्री दशाश्वमेध घाट पहुंचेंगे. यहां बने फ्लोटिंग प्लेटफार्म से गंगा की पूजा करने के बाद भव्य गंगा आरती में शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री के रोड-शो में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
विपक्षी दलों ने मतगणना के वक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से मिलान किए जाने वाले वीवीपैट यानी वोटर वेरीफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू के नेतृत्व में 21 गैर-एनडीए नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में अपने 8 अप्रैल के आदेश की समीक्षा की मांग की है.
कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह हर विधानसभा क्षेत्र में एक वीवीपैट मशीन की संख्या बढ़ाकर पांच करे.
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलाइंस जियो ने भारती एयरटेल को ओवरटेक कर लिया है और भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन गई है.
30.6 करोड़ सब्सक्राइबर वाले जियो अब सिर्फ वोडाफोन-आइडिया से पीछे है. एयरटेल के 28.4 करोड़ सब्सक्राइबर हैं, जबकि वोडाफोन ने घोषणा की है कि दिसंबर 2018 में उसके सब्सक्राइबर 38.7 करोड़ थे.
सूडान में अस्थाई सत्ता चला रही सैन्य परिषद के तीन सबसे विवादित नेताओं ने अपने इस्तीफ़े देने का प्रस्ताव दिया है.
ये तीनों कट्टर इस्लामवादी हैं और सत्ता से हटाए गए पूर्व राष्ट्रपति ओमर अल बशीर के पक्के समर्थक हैं.
प्रदर्शनकारी इन तीनों के प्रशासन से हटने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और सैन्य परिषद के बीच वार्ता के बाद इन्होंने इस्तीफ़े की पेशकश की है.
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सत्ता जल्द ही नागरिकों के हाथों में आ जाए. एक प्रेस वार्ता में सैन्य परिषद के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्ष अधिकतर मुद्दों पर सहमत हो गए हैं और मतभेद ख़त्म करने के लिए साझा समिति बनाने पर भी सहमति बनी है.
दूसरी ओर गुरुवार को व्यापक प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है. हज़ारों प्रदर्शनकारी राजधानी ख़र्तूम पहुंच रहे हैं.
Thursday, April 25, 2019
Thursday, April 11, 2019
ओवैसी भाषण भड़काऊ देते हैं, पर उन्हें मुस्लिम नेता कहलाना पसंद नहीं
चार मीनार के पास घनी आबादी वाली एक बस्ती। सड़क के दोनों तरफ छोटे-मोटे कारोबार करने वालों की दुकानें हैं। एक तरफ एक मस्जिद है, दूसरी तरफ इस्लामिक लाइब्रेरी एंड रीडिंग रूम का बोर्ड। इन सबके बीच बाज़ार में एक स्टेज खड़ा कर दिया गया है। मंच पर वक्ता गरमा-गरम तकरीरें कर रहे हैं। नीचे कुर्सियों पर बैठे श्रोता जुमला पसंद आने पर ‘नाराए तकबीर, अल्लाहो अकबर’ के नारे लगाते हैं।
पर ये सब टाइम पास वक्ता हैं। लोगों को मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी का इंतज़ार है, जो हैदराबाद से सांसद हैं, और जोशीले, चुटीले और लच्छेदार भाषणों के लिए मशहूर हैं। पर उसके पहले उनके छोटे भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी तशरीफ़ लाते हैं, जो अभद्र भाषा और भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्ख़ियों में रहते हैं।
उनका भाषण ख़त्म होते-होते मीटिंग में एक बिजली सी दौड़ जाती है। असदुद्दीन ओवैसी आ चुके हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कुर्सियों पर खड़े हो जाते हैं। ओवैसी लोगों को धार्मिक नारे लगाने के लिए झिड़कते हैं। पर वे उन्हें निराश भी नहीं करते। शुरुआत में ही वे अपने उस विवादास्पद भाषण का जिक्र करते हैं जिसमें पुलवामा हमले के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि लगता है कि वे ‘बड़े की बिरयानी खाकर सो गए थे।’
‘लोगां मेरे कू बोला कि वो गोश्त नहीं खाते। अब मेरे को क्या मालूम कि क्या खाते। चलो, मान लिया भाई। तो अब मैं पूछता, क्या वे ढोकला खाकर सो गए थे? इडली बड़ा खाकर सो गए थे? वेजिटेबल बिरयानी खाकर सो गए थे?’ ‘नरेंदर मोदी ने जेट एयरवेज के नरेश गोयल को स्टेट बैंक का 1500 करोड़ दे दिया। बाप की जागीर है? देश के पैसे पर महबूब की मदद! मैं बोलां बाप के जागीर, तो इसपर बोलेंगे। मैं तो बोलेंगा। क्या करते तुम?’
हैदराबाद लोक सभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग आधी है। वे ओवैसी के ऐसे ही बोलों पर फिदा हैं। 49 साल के ओवैसी दो बार विधान सभा और तीन दफा लोक सभा जीत चुके हैं। 1984 से मजलिस ने क्षेत्र में आज तक कभी हार का मुंह नहीं देखा। असदुद्दीन के पहले उनके वालिद एमपी थे।
ओवैसी कहते हैं, ‘मैं अपने को केवल मुस्लिम नेता के रूप में नहीं देखता हूं।’ लंदन से बैरिस्टरी पढ़े ओवैसी इस्लामिक स्टेट को ‘जहन्नुम के कुत्ते’ कह चुके हैं और अपने आप को ‘ख्वाजा अजमेरी की जमीन की हिंदुस्तान की साझा संस्कृति’ का नुमाइंदा मानते हैं। पर भड़काऊ भाषणों की वजह से उनकी तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से होती है। यही वजह है कि उनकी पार्टी को हैदराबाद के बाहर आजतक कोई खास कामयाबी नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी दूसरी बार भागलपुर आए। इससे पहले वे 2015 में भागलपुर आए थे। तब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पीएम इन वेटिंग रहते 2014 में उन्होंने सैंडिस कंपाउंड में सभा को संबोधित किया था।
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।
पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।
यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।
पर ये सब टाइम पास वक्ता हैं। लोगों को मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी का इंतज़ार है, जो हैदराबाद से सांसद हैं, और जोशीले, चुटीले और लच्छेदार भाषणों के लिए मशहूर हैं। पर उसके पहले उनके छोटे भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी तशरीफ़ लाते हैं, जो अभद्र भाषा और भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्ख़ियों में रहते हैं।
उनका भाषण ख़त्म होते-होते मीटिंग में एक बिजली सी दौड़ जाती है। असदुद्दीन ओवैसी आ चुके हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कुर्सियों पर खड़े हो जाते हैं। ओवैसी लोगों को धार्मिक नारे लगाने के लिए झिड़कते हैं। पर वे उन्हें निराश भी नहीं करते। शुरुआत में ही वे अपने उस विवादास्पद भाषण का जिक्र करते हैं जिसमें पुलवामा हमले के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि लगता है कि वे ‘बड़े की बिरयानी खाकर सो गए थे।’
‘लोगां मेरे कू बोला कि वो गोश्त नहीं खाते। अब मेरे को क्या मालूम कि क्या खाते। चलो, मान लिया भाई। तो अब मैं पूछता, क्या वे ढोकला खाकर सो गए थे? इडली बड़ा खाकर सो गए थे? वेजिटेबल बिरयानी खाकर सो गए थे?’ ‘नरेंदर मोदी ने जेट एयरवेज के नरेश गोयल को स्टेट बैंक का 1500 करोड़ दे दिया। बाप की जागीर है? देश के पैसे पर महबूब की मदद! मैं बोलां बाप के जागीर, तो इसपर बोलेंगे। मैं तो बोलेंगा। क्या करते तुम?’
हैदराबाद लोक सभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग आधी है। वे ओवैसी के ऐसे ही बोलों पर फिदा हैं। 49 साल के ओवैसी दो बार विधान सभा और तीन दफा लोक सभा जीत चुके हैं। 1984 से मजलिस ने क्षेत्र में आज तक कभी हार का मुंह नहीं देखा। असदुद्दीन के पहले उनके वालिद एमपी थे।
ओवैसी कहते हैं, ‘मैं अपने को केवल मुस्लिम नेता के रूप में नहीं देखता हूं।’ लंदन से बैरिस्टरी पढ़े ओवैसी इस्लामिक स्टेट को ‘जहन्नुम के कुत्ते’ कह चुके हैं और अपने आप को ‘ख्वाजा अजमेरी की जमीन की हिंदुस्तान की साझा संस्कृति’ का नुमाइंदा मानते हैं। पर भड़काऊ भाषणों की वजह से उनकी तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से होती है। यही वजह है कि उनकी पार्टी को हैदराबाद के बाहर आजतक कोई खास कामयाबी नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी दूसरी बार भागलपुर आए। इससे पहले वे 2015 में भागलपुर आए थे। तब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पीएम इन वेटिंग रहते 2014 में उन्होंने सैंडिस कंपाउंड में सभा को संबोधित किया था।
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।
पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।
यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।
Wednesday, April 3, 2019
नीतीश बोले- लालू जेल से फोन पर सियासत करते हैं, फिर उनके कमरे की 4 दिन में दूसरी बार तलाशी हुई
रांची. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि लालू प्रसाद यादव जेल से फोन पर सियासत करते हैं। इसके बाद रांची जिला प्रशासन हरकत में आया और रिम्स में भर्ती लालू के पेइंग वार्ड (नंबर-10) की आधे घंटे तक तलाशी ली। लालू के वार्ड की यह चार दिनों में दूसरी तलाशी थी। हालांकि, अधिकारियों को जांच में कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला।
तलाशी के बाद पुलिस अधिकारियों ने रिम्स के निदेशक दिनेश कुमार सिंह से मुलाकात की और सुरक्षा को लेकर सुझाव दिए। तैनात सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया गया कि बिना जेल सुपरिटेंडेंट की अनुमति के कोई भी वार्ड में प्रवेश नहीं कर सकता।
7 महीने से अस्पताल में भर्ती हैं लालू
लालू पिछले साल अगस्त से ही खराब स्वास्थ्य के चलते रिम्स में भर्ती हैं। चारा घोटाला में दोषी पाए जाने के बाद यह पहली बार है जब राजद उनके बिना लोकसभा चुनाव में उतर रही है। पार्टी की कमान फिलहाल उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव संभाल रहे हैं। बिहार में लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होने हैं। नतीजे 23 मई को आएंगे।
सिर्फ दो लोगों को साथ रहने की है अनुमति
लालू प्रसाद के साथ अभी दो लोगों को साथ रहने की अनुमति है। एक उनके खाने-पीने का और दूसरा उनकी दवाओं का ध्यान रखता है। लालू की सुरक्षा में दो शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी तैनात रहते हैं। एक शिफ्ट में करीब 25 सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी वहां तैनात रहते हैं।
इससे पहले शनिवार को भी सदर डीएसपी और सिटी डीएसपी ने रिम्स के पेइंग वार्ड में लालू के वार्ड की जांच की थी। उस दिन भी तलाशी करीब आधे घंटे तक चली थी।
लालू के वार्ड की सुरक्षा बढ़ाई : रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती लालू प्रसाद की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वार्ड की घेराबंदी कर दी गई है। स्कैनर लगा दिया गया है। स्कैनर से होकर ही डॉक्टर और सेवादारों को जाने की अनुमति है। सेवादारों को पुलिस ने निर्देश दिया है कि वह सामान और खाना सुरक्षाकर्मियों को दे दें। कमरे में जाने की जरूरत नहीं है।
दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं : 71 साल के लालू प्रसाद यादव दिसंबर 2017 से जेल में हैं। हालांकि, इस बीच लालू को इलाज के लिए हाईकोर्ट से कई बार जमानत भी मिल चुकी है। हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2018 को उनकी जमानत खारिज करते हुए 30 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से लालू रिम्स में इलाजरत हैं।
हरबिंदर सिंह भूपाल, मोगा. आधा हिन्दुस्तान की सीरीज में आज मिलिए हरमनप्रीत कौर से। भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान। हरमन को क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से 2017 में अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। हरमन देश की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में शतक लगाया है। चुनाव के मद्देनजर भास्कर ने जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा- महिलाओं की समस्या का एक ही हल है। उन्हें राजनीति में 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।
महिलाओं के मन की बात क्या है?
महिलाओं के मन में भी देश की खुशहाली ही बसती है। लेकिन इसके बीच महिलाओं के हकों की सुरक्षा भी जरूरी हैं। जो इस तरह की सोच रखे, उन्हीं नेताओं को ही वोट मिलने चाहिए।
एक ओर सबरीमाला विवाद है... दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े बड़े फैसले हैं। क्या ये महिला वोटर्स को आकर्षित करते हैं?
फर्क इससे पड़ता है कि ऐसे कितने फैसले लागू हो पाते हैं।
इस चुनाव में पार्टी देखेंगी या प्रधानमंत्री पद का चेहरा?
न दल, न चेहरा। दोनों ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। मैं तो सिर्फ इतना देखूंगी कि देश को एक साथ जोड़कर आगे कौन ले जा सकता है।
तलाशी के बाद पुलिस अधिकारियों ने रिम्स के निदेशक दिनेश कुमार सिंह से मुलाकात की और सुरक्षा को लेकर सुझाव दिए। तैनात सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया गया कि बिना जेल सुपरिटेंडेंट की अनुमति के कोई भी वार्ड में प्रवेश नहीं कर सकता।
7 महीने से अस्पताल में भर्ती हैं लालू
लालू पिछले साल अगस्त से ही खराब स्वास्थ्य के चलते रिम्स में भर्ती हैं। चारा घोटाला में दोषी पाए जाने के बाद यह पहली बार है जब राजद उनके बिना लोकसभा चुनाव में उतर रही है। पार्टी की कमान फिलहाल उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव संभाल रहे हैं। बिहार में लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होने हैं। नतीजे 23 मई को आएंगे।
सिर्फ दो लोगों को साथ रहने की है अनुमति
लालू प्रसाद के साथ अभी दो लोगों को साथ रहने की अनुमति है। एक उनके खाने-पीने का और दूसरा उनकी दवाओं का ध्यान रखता है। लालू की सुरक्षा में दो शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी तैनात रहते हैं। एक शिफ्ट में करीब 25 सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी वहां तैनात रहते हैं।
इससे पहले शनिवार को भी सदर डीएसपी और सिटी डीएसपी ने रिम्स के पेइंग वार्ड में लालू के वार्ड की जांच की थी। उस दिन भी तलाशी करीब आधे घंटे तक चली थी।
लालू के वार्ड की सुरक्षा बढ़ाई : रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती लालू प्रसाद की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वार्ड की घेराबंदी कर दी गई है। स्कैनर लगा दिया गया है। स्कैनर से होकर ही डॉक्टर और सेवादारों को जाने की अनुमति है। सेवादारों को पुलिस ने निर्देश दिया है कि वह सामान और खाना सुरक्षाकर्मियों को दे दें। कमरे में जाने की जरूरत नहीं है।
दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं : 71 साल के लालू प्रसाद यादव दिसंबर 2017 से जेल में हैं। हालांकि, इस बीच लालू को इलाज के लिए हाईकोर्ट से कई बार जमानत भी मिल चुकी है। हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2018 को उनकी जमानत खारिज करते हुए 30 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से लालू रिम्स में इलाजरत हैं।
हरबिंदर सिंह भूपाल, मोगा. आधा हिन्दुस्तान की सीरीज में आज मिलिए हरमनप्रीत कौर से। भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान। हरमन को क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से 2017 में अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। हरमन देश की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में शतक लगाया है। चुनाव के मद्देनजर भास्कर ने जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा- महिलाओं की समस्या का एक ही हल है। उन्हें राजनीति में 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।
महिलाओं के मन की बात क्या है?
महिलाओं के मन में भी देश की खुशहाली ही बसती है। लेकिन इसके बीच महिलाओं के हकों की सुरक्षा भी जरूरी हैं। जो इस तरह की सोच रखे, उन्हीं नेताओं को ही वोट मिलने चाहिए।
एक ओर सबरीमाला विवाद है... दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े बड़े फैसले हैं। क्या ये महिला वोटर्स को आकर्षित करते हैं?
फर्क इससे पड़ता है कि ऐसे कितने फैसले लागू हो पाते हैं।
इस चुनाव में पार्टी देखेंगी या प्रधानमंत्री पद का चेहरा?
न दल, न चेहरा। दोनों ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। मैं तो सिर्फ इतना देखूंगी कि देश को एक साथ जोड़कर आगे कौन ले जा सकता है।
Subscribe to:
Comments (Atom)