قالت الممثلة الخاصة للأمين العام للأمم المتحدة في العراق جانين هينيس بلاسخارت في 11 نوفمبر/تشرين الثاني 2019 إن المرجع الديني الأعلى لشعية العراق آية الله علي السيستاني يساند تنفيذ إصلاحات جدية خلال فترة زمنية معقولة.
وأضافت أن السيستاني عبر أيضا عن قلقه من افتقار النخبة السياسية للجدية الكافية بشأن تنفيذ الإصلاحات.
وقالت المسؤولة الأممية عقب لقائها السيستاني "لا يمكن أن يعود المحتجون السلميون إلى بيوتهم دون نتائج ملموسة".
وكانت بعثة الأمم المتحدة إلى العراق قد نشرت قبل يوم مقترحا لحل الأزمة التي يمر بها العراق منذ اسابيع. ويشهد العراق مظاهرات واعتصامات في مختلف المدن قتل فيها المئات وأصيب الآلاف.
وتقود البعثة الأممية مساعي حثيثة لإيجاد مخرج للأزمة التي تعصف بالعراق دون أن تلوح في الأفق امكانية الخروج من هذه الأزمة.
لكن مواقف وتصريحات الممثلة الاممية اثارت غضب العديد من العراقيين الذين رأوا فيها انحيازا لموقف الحكومة العراقية.
بيانات البعثة وتغريدات رئيستها لم تكن واضحة في الوقوف إلى جانب المتظاهرين وإدانة عمليات القتل التي سقط فيها أكثر من 300 متظاهر سلمي في مختلف أنحاء العراق وهو ما أثار غضب المتظاهرين والنشطاء الذين اتهموها بالانحياز للحكومة العراقية.
ومنذ اندلاع الاحتجاجات في العراق زارت المبعوثة الدولية ساحة التحرير والتقت بممثلين عن المتظاهرين كما التقت بعدد من المسؤولين الحكوميين وأصدرت عدة بيانات إدانة وشجب لاعمال العنف.
وقد اضطرت بلاسخارت الى الدفاع عن موقفها والرد على هذه التهمة نافية انحيازها لأي طرف وقالت: "الأمم المتحدة شريكة كل عراقي يحاول التغيير. بوحدتهم يستطيع العراقيون أن يحولوا بلدهم إلى مكان أفضل ونحن موجودون هنا لتوفير الدعم اللازم".
وكانت بلاسخارت قد نشرت تغريدة على صفحتها في تويتر قالت فيها: "إن عرقلة عمل منشآت البنية التحية الأساسية يثير قلقنا البالغ. الجميع يتحمل مسؤولية حماية المنشآت العامة. إن إغلاق الطرق المؤدية إلى المنشآت النفطية والموانئ أو التهديد بإغلاقها يكبد البلاد خسائر بالمليارات".
ورأى العديد من النشطاء أن هذا الموقف يتماشى مع موقف الحكومة العراقية إلى حد ما.
وزارت بلاسخارت ساحة التحرير في 30 الشهر الماضي وعلى إثرها أصدرت بياناً جاء فيه: "إن الحكومة ليس بوسعها أن تعالج بشكل كلي تركة الماضي والتحديات الراهنة خلال عامٍ واحدٍ فقط من عمرها".
وقبل ذلك بيوم واحد كانت الأنباء قد ذكرت وقوع نحو 30 قتيلا ومئات الجرحى نتيجة إطلاق النار على المتظاهرين في مدينة كربلاء وهو ما يمثل أكبر عدد من الضحايا في حادث واحد منذ اندلاع المظاهرات الأخيرة.
وأصدرت بلاسخارت بيانا جاء فيه: "وأكثر ما يثير القلق في التطورات الأخيرة في أنحاء كثيرة من العراق لا سيما في كربلاء الليلة الماضية إذ تشير تقارير شهود إلى استخدام الرصاص الحي ضد المتظاهرين مما تسبب في أعداد كبيرة من الاصابات".
البيان يخلو من إدانة عمليات إطلاق النار على المتظاهرين كما يتفادى تحميل القوات الحكومية أو أي طرف آخر المسؤولية عن الحادث الدامي مما زاد من غضب المتظاهرين من موقف المسؤولة الأممية.
وأسند الأمين العام للامم المتحدة أنطونيو غوتيريش إلى السياسية والدبلوماسية الهولندية بلاسخارت، مواليد أبريل/نيسان 1973، منصب رئاسة البعثة الاممية في العراق في آواخر شهر أغسطس /آب 2018 خلفا للسلوفاكي يان كوبيس.
وقد نشرت الأمم المتحدة موجزاً عن مسيرتها المهنية جاء فيها أن جانين لديها خبرة سياسية ودبلوماسية تمتد لأكثر من 20 عاماً، حيث شغلت مناصب وزارية وبرلمانية مهمة في بلادها هولندا.
فقد كانت بلاسخارت أول وزيرة للدفاع في هولندا وتولت هذا المنصب خلال الفترة ما بين 2012 إلى 2017 وهي الفترة التي شهدت ظهور ما يسمى بتنظيم الدولة الاسلامية.
وبحكم منصبها كانت مسؤولة عن قيادة عمل أركان القوات المسلحة وقيادة قوات الدعم وهيئة التموين العسكري والقوات الملكية الهولندية الأربع: الجوية، البحرية، البرية والشرطة العسكرية والحدودية.
وتولت الاشراف على مشاركة بلادها في الحرب على الجماعات المتطرفة في كل مالي في القارة الأفريقية وأفغانستان والعراق وكانت المسؤولة عن التنسيق مع الاتحاد الاوروبي وحلف شمال الأطلسي -الناتو والأمم المتحدة.
Tuesday, November 12, 2019
Thursday, October 31, 2019
पाकिस्तान: ट्रेन में आग लगने से 73 लोगों की मौत
पाकिस्तान रेलवे की तेज़ गाम एक्सप्रेस में आग लगने से कम से कम 73 लोगों की मौत हो गई है और उनमें ज़्यादातर की पहचान नहीं हो सकी है.
तेज़ गाम एक्सप्रेस कराची से रावलपिंडी के बीच चलती है. रावलपिंडी की ओर जाते समय लियाक़त पुर में उसकी तीन बोगियों में आग लग गई.
रहीम यार ख़ान के डिप्टी कमिश्नर जमील अहमद जमील ने बीबीसी को बताया है कि घटना में 73 लोगों की मौत हुई है जबकि 40 अन्य लोग ज़ख़्मी हैं. अधिकारियों के मुताबिक मृतकों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है. घायलों का शेख़ ज़ाएद अस्पताल के बर्न सेंटर इलाज चल रहा है.
रेल मंत्री शेख राशिद अहमद का कहना था कि पीड़ितों में तबलीग़ी जमात का एक समूह था जो लाहौर में इज्तिमा के लिए यात्रा कर रहा था. उनका कहना था कि यात्रियों के पास नाश्ते का सामान, सिलिंडर और चूल्हे थे, सिलिंडर के फटने से आग लगी.
उन्होंने बताया कि आग पर क़ाबू पा लिया गया है और तीन बोगियां प्रभावित हुई हैं. ज़ख़्मियों को क़रीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उनका कहना था कि ट्रेन पटरी से नहीं उतरी और उसे एक घंटे के अंदर-अंदर लियाक़तपुर जंक्शन पहुंचा दिया जाएगा.
हादसे के बाद कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया था लेकिन अब पाकिस्तान रेलवे की 134 ट्रेनों और उनके अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम को बहाल कर दिया गया है.
रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक़, घटना का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दुख ज़ाहिर किया है और पीड़ितों को ठीक इलाज देने का आदेश जारी किया है.
रेल मंत्री शेख़ रशीद ने बताया है कि यात्रियों और ट्रेन का बीमा हुआ है जिससे आर्थिक नुक़सान की क्षतिपूर्ति हो सकेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना की आगे जांच की जाएगी.
निजी चैनल से बात करते हुए शेख़ रशीद का कहना था कि एक ही नाम से कई बोगियों की बुकिंग हुई थी. अधिकारी मारे गए लोगों की शिनाख़्त करने की कोशिश कर रहे हैं.
पाकिस्तान के रेल मंत्री ने कहा, ''गुरुवार सुबह साढ़े छह बजे तेज़ गाम में अमीर हुसैन साहब जो तबलीग़ी (धर्म प्रचारक) जमात के अमीर हैं, ने दो कोचें बुक की थीं. वो ज़िंदा हैं. इसमें वो मेहराबपुर, नवाबशाह हैदराबाद से उन्होंने सवारियों को बिठाया. इसमें दो सिलिंडर और चूल्हा फट जाने की वजह से 62 पैसेंजर की मौत हो गई.''
''पीड़ित परिवारों को 15 लाख और घायलों को पांच लाख रुपये की मदद दी जाएगी. आर्मी और दूसरी जमातें मौक़े पर पहुंच गई हैं. मैं ख़ुद वहां जा रहा हूँ ताकि इमदाद को मॉनिटर कर सकूं. आमिर हुसैन साब से राब्ता हो गया है. सबके नाम मौजूद हैं. हम परिवारों से संपर्क करेंगे.''
तेज़ गाम एक्सप्रेस कराची से रावलपिंडी के बीच चलती है. रावलपिंडी की ओर जाते समय लियाक़त पुर में उसकी तीन बोगियों में आग लग गई.
रहीम यार ख़ान के डिप्टी कमिश्नर जमील अहमद जमील ने बीबीसी को बताया है कि घटना में 73 लोगों की मौत हुई है जबकि 40 अन्य लोग ज़ख़्मी हैं. अधिकारियों के मुताबिक मृतकों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है. घायलों का शेख़ ज़ाएद अस्पताल के बर्न सेंटर इलाज चल रहा है.
रेल मंत्री शेख राशिद अहमद का कहना था कि पीड़ितों में तबलीग़ी जमात का एक समूह था जो लाहौर में इज्तिमा के लिए यात्रा कर रहा था. उनका कहना था कि यात्रियों के पास नाश्ते का सामान, सिलिंडर और चूल्हे थे, सिलिंडर के फटने से आग लगी.
उन्होंने बताया कि आग पर क़ाबू पा लिया गया है और तीन बोगियां प्रभावित हुई हैं. ज़ख़्मियों को क़रीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उनका कहना था कि ट्रेन पटरी से नहीं उतरी और उसे एक घंटे के अंदर-अंदर लियाक़तपुर जंक्शन पहुंचा दिया जाएगा.
हादसे के बाद कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया था लेकिन अब पाकिस्तान रेलवे की 134 ट्रेनों और उनके अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम को बहाल कर दिया गया है.
रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक़, घटना का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दुख ज़ाहिर किया है और पीड़ितों को ठीक इलाज देने का आदेश जारी किया है.
रेल मंत्री शेख़ रशीद ने बताया है कि यात्रियों और ट्रेन का बीमा हुआ है जिससे आर्थिक नुक़सान की क्षतिपूर्ति हो सकेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना की आगे जांच की जाएगी.
निजी चैनल से बात करते हुए शेख़ रशीद का कहना था कि एक ही नाम से कई बोगियों की बुकिंग हुई थी. अधिकारी मारे गए लोगों की शिनाख़्त करने की कोशिश कर रहे हैं.
पाकिस्तान के रेल मंत्री ने कहा, ''गुरुवार सुबह साढ़े छह बजे तेज़ गाम में अमीर हुसैन साहब जो तबलीग़ी (धर्म प्रचारक) जमात के अमीर हैं, ने दो कोचें बुक की थीं. वो ज़िंदा हैं. इसमें वो मेहराबपुर, नवाबशाह हैदराबाद से उन्होंने सवारियों को बिठाया. इसमें दो सिलिंडर और चूल्हा फट जाने की वजह से 62 पैसेंजर की मौत हो गई.''
''पीड़ित परिवारों को 15 लाख और घायलों को पांच लाख रुपये की मदद दी जाएगी. आर्मी और दूसरी जमातें मौक़े पर पहुंच गई हैं. मैं ख़ुद वहां जा रहा हूँ ताकि इमदाद को मॉनिटर कर सकूं. आमिर हुसैन साब से राब्ता हो गया है. सबके नाम मौजूद हैं. हम परिवारों से संपर्क करेंगे.''
Tuesday, September 17, 2019
"Это не розыгрыш". Создатель золотого унитаза - о краже из дворца Бленхейм
"Мне кажется, я оказался в фильме про похищение", - сказал итальянский художник-концептуалист Маурицио Каттелан, комментируя ситуацию с украденным золотым унитазом из дворца Бленхейм в графстве Оксфордшир.
Художник заявил, что его очень огорчили предположения, что он сам инсценировал кражу экспоната ради розыгрыша.
Унитаз, стоимость которого оценивается в 6 млн долларов, был похищен в субботу из семейной резиденции Черчиллей, где проходит выставка работ Каттелана, и до сих пор не найден.
В тот же день был задержан 66-летний мужчина, которого затем отпустили под залог.
Управляющий дворца Бленхейм Доминик Хэйр сказал в интервью Би-би-си: "Демонстрация произведений искусства всегда сопряжена с риском. Наверное, надежнее всего просто поместить их в сейф и запереть. Однако нам кажется, риск того стоит".
Работающий унитаз под названием "Америка" был выставлен во дворце в четверг и стал частью экспозиции итальянского художника.
Посетители могли воспользоваться золотым унитазом по назначению, для чего нужно было заранее записаться. Каждый желающий получал в свое распоряжение три минуты.
Полиция считает, что кража была совершена группой преступников, которые воспользовались двумя автомобилями.
В августе сводный брат владельца замка Эдвард Спенсер-Черчилль сказал, что украсть унитаз было бы крайне непростой задачей.
Унитаз был подключен к канализационной системе дворца, и его кража нанесла значительный ущерб дворцу из-за затопления.
Доминик Хэйр сказал, что это первая подобная кража из дворца, в котором родился Уинстон Черчилль. Он отметил, что в здании установлена современная охранная система.
"Но суть в том, что это случилось, и нам необходимо хорошенько проверить свои методы работы и вновь их улучшить", - сказал он.
Художник заявил, что его очень огорчили предположения, что он сам инсценировал кражу экспоната ради розыгрыша.
Унитаз, стоимость которого оценивается в 6 млн долларов, был похищен в субботу из семейной резиденции Черчиллей, где проходит выставка работ Каттелана, и до сих пор не найден.
В тот же день был задержан 66-летний мужчина, которого затем отпустили под залог.
Управляющий дворца Бленхейм Доминик Хэйр сказал в интервью Би-би-си: "Демонстрация произведений искусства всегда сопряжена с риском. Наверное, надежнее всего просто поместить их в сейф и запереть. Однако нам кажется, риск того стоит".
Работающий унитаз под названием "Америка" был выставлен во дворце в четверг и стал частью экспозиции итальянского художника.
Посетители могли воспользоваться золотым унитазом по назначению, для чего нужно было заранее записаться. Каждый желающий получал в свое распоряжение три минуты.
Полиция считает, что кража была совершена группой преступников, которые воспользовались двумя автомобилями.
В августе сводный брат владельца замка Эдвард Спенсер-Черчилль сказал, что украсть унитаз было бы крайне непростой задачей.
Унитаз был подключен к канализационной системе дворца, и его кража нанесла значительный ущерб дворцу из-за затопления.
Доминик Хэйр сказал, что это первая подобная кража из дворца, в котором родился Уинстон Черчилль. Он отметил, что в здании установлена современная охранная система.
"Но суть в том, что это случилось, и нам необходимо хорошенько проверить свои методы работы и вновь их улучшить", - сказал он.
Wednesday, August 28, 2019
Британское правительство хочет приостановить работу парламента
Правительство Британии обратится к королеве с просьбой приостановить работу парламента буквально через несколько дней после того, как депутаты вернутся с каникул, и за несколько недель до выхода страны из Евросоюза.
Это значит, что кабинету премьера Бориса Джонсона удастся перенести речь королевы, в которой излагаются планы правительства, на 14 октября, сообщает политический обозреватель Би-би-си Лора Кюнсберг.
Это также означает, что у членов парламента не останется времени на принятие каких-либо законов, которые могли бы помешать премьер-министру вывести Британию из Евросоюза без соглашения 31 октября.
По ее словам, подобный шаг может вызвать серьезный политический кризис, поскольку, как считают депутаты, это лишит их возможности полноценно участвовать в процессе "брексита".
Борис Джонсон заявлял, что хотел бы, чтобы Британия вышла из ЕС с соглашением, но если соглашения не будет, страна все равно покинет Евросоюз 31 октября.
Эта позиция побудила ряд оппозиционных депутатов объединиться, чтобы попытаться сорвать планы Бориса Джонсона и заблокировать возможный "жесткий брексит", используя для этого парламентский процесс.
Но если работа парламента будет приостановлена, как это предлагается, 10 сентября, у парламентариев будет всего несколько дней на следующей неделе, чтобы добиться изменений.
Заместитель лидера лейбористов Том Уотсон написал в "Твиттере", что это "абсолютно скандальное оскорбление нашей демократии".
Первый министр Шотландии Никола Стерджен заявила, что парламентарии должны остановить правительство, "иначе сегодняшний день войдет в историю как по-настоящему черный день для британской демократии".
Обычно парламент ненадолго приостанавливает работу каждый год - в апреле или в мае. В это время прекращается вся законодательная работа, а законопроекты, которые парламент не успел принять, утрачивают возможность быть принятыми (однако в некоторых случаях их рассмотрение может быть перенесено на следующую сессию).
Все члены парламента и министры сохраняют свои места, но никакие обсуждения и голосования в парламенте не проводятся.
Это не то же самое, что роспуск парламента - когда депутаты слагают полномочия, и назначаются всеобщие выборы.
Теоретически премьер-министр может добиться приостановки работы парламента - в этом вопросе у депутатов нет права голоса, и решение принимает королева по просьбе главы правительства.
Это значит, что кабинету премьера Бориса Джонсона удастся перенести речь королевы, в которой излагаются планы правительства, на 14 октября, сообщает политический обозреватель Би-би-си Лора Кюнсберг.
Это также означает, что у членов парламента не останется времени на принятие каких-либо законов, которые могли бы помешать премьер-министру вывести Британию из Евросоюза без соглашения 31 октября.
По ее словам, подобный шаг может вызвать серьезный политический кризис, поскольку, как считают депутаты, это лишит их возможности полноценно участвовать в процессе "брексита".
Борис Джонсон заявлял, что хотел бы, чтобы Британия вышла из ЕС с соглашением, но если соглашения не будет, страна все равно покинет Евросоюз 31 октября.
Эта позиция побудила ряд оппозиционных депутатов объединиться, чтобы попытаться сорвать планы Бориса Джонсона и заблокировать возможный "жесткий брексит", используя для этого парламентский процесс.
Но если работа парламента будет приостановлена, как это предлагается, 10 сентября, у парламентариев будет всего несколько дней на следующей неделе, чтобы добиться изменений.
Заместитель лидера лейбористов Том Уотсон написал в "Твиттере", что это "абсолютно скандальное оскорбление нашей демократии".
Первый министр Шотландии Никола Стерджен заявила, что парламентарии должны остановить правительство, "иначе сегодняшний день войдет в историю как по-настоящему черный день для британской демократии".
Обычно парламент ненадолго приостанавливает работу каждый год - в апреле или в мае. В это время прекращается вся законодательная работа, а законопроекты, которые парламент не успел принять, утрачивают возможность быть принятыми (однако в некоторых случаях их рассмотрение может быть перенесено на следующую сессию).
Все члены парламента и министры сохраняют свои места, но никакие обсуждения и голосования в парламенте не проводятся.
Это не то же самое, что роспуск парламента - когда депутаты слагают полномочия, и назначаются всеобщие выборы.
Теоретически премьер-министр может добиться приостановки работы парламента - в этом вопросе у депутатов нет права голоса, и решение принимает королева по просьбе главы правительства.
Tuesday, August 20, 2019
光复红土对添马公园:香港“反送中”游行与亲政府示威分庭抗礼
香港“反送中”示威进入第11周,经历上周尖沙咀、太古与机场等地连场冲突后,示威者与其反对阵营在较平静的气氛下各自集会游行。
建制派与民主派星期六(8月17日)分别发起三场活动。民主派人士发起的游行在傍晚结束后,部分示威者继续前进至旺角一带与警方发生小规模冲突,但整体情况比较平静。
近来北京政府对待香港局势的态度越来越强硬,香港各派别表态的分化也愈发明显。香港多位房地产界大亨出席亲北京政党民建联所办集会,表示反对暴力。主办方声称有47.6万人出席,警方则称最高峰时有10.8万人。
而在另外两场游行中,教师与社区参加者继续高喊“五大诉求,缺一不可”等口号,要求正式撤回《逃犯条例》修正草案,以及独立调查警方执法滥权指控。
今年6月以来,香港因特区政府建议修订《逃犯条例》爆发多场示威。在经历数周剑拔弩张的局势之后,上周末香港再现大规模集会,要求香港政府撤回《逃犯条例》修订及成立独立委员会调查警方执法方式,但示威者与警察间没有发生激烈冲突。
在这之前,北京与香港政府对示威者的态度日渐强硬。截至8月16日,警方已逮捕700余人,检控超过100人。中国政府称,香港示威者已经出现“恐怖主义苗头”。
对于香港持续两个多月的“反送中”风波,你最关注什么问题?最感兴趣的话题又是什么?
欢迎参加BBC中文的《你问我答》,用下表在东八区时间8月21日(星期三)晚12点前提交您最关注、最感兴趣的话题,我们将选出一些热门话题作答。
建制派与民主派星期六(8月17日)分别发起三场活动。民主派人士发起的游行在傍晚结束后,部分示威者继续前进至旺角一带与警方发生小规模冲突,但整体情况比较平静。
近来北京政府对待香港局势的态度越来越强硬,香港各派别表态的分化也愈发明显。香港多位房地产界大亨出席亲北京政党民建联所办集会,表示反对暴力。主办方声称有47.6万人出席,警方则称最高峰时有10.8万人。
而在另外两场游行中,教师与社区参加者继续高喊“五大诉求,缺一不可”等口号,要求正式撤回《逃犯条例》修正草案,以及独立调查警方执法滥权指控。
今年6月以来,香港因特区政府建议修订《逃犯条例》爆发多场示威。在经历数周剑拔弩张的局势之后,上周末香港再现大规模集会,要求香港政府撤回《逃犯条例》修订及成立独立委员会调查警方执法方式,但示威者与警察间没有发生激烈冲突。
在这之前,北京与香港政府对示威者的态度日渐强硬。截至8月16日,警方已逮捕700余人,检控超过100人。中国政府称,香港示威者已经出现“恐怖主义苗头”。
对于香港持续两个多月的“反送中”风波,你最关注什么问题?最感兴趣的话题又是什么?
欢迎参加BBC中文的《你问我答》,用下表在东八区时间8月21日(星期三)晚12点前提交您最关注、最感兴趣的话题,我们将选出一些热门话题作答。
Wednesday, July 31, 2019
香港抗议:上环冲突后44人被控“暴动罪”
香港上环周日(7月28日)发生严重警民冲突后,警察拘捕了49人,之后决定以暴动罪控告其中44人,周三(7月31日)早上首次提讯。所有人都获准保释等候警方作进一步调查,但有一名被告没有出席聆讯,被法庭发出拘捕令。
警方透露,上环冲突被拘捕的人年龄在16至41岁之间。这次被起诉暴动的被告,有13人不足21岁,许多都是学生,其他人包括教师、护士、飞机师及厨师等。
聆讯开始前,法院大楼外边聚集了数百名市民,冒着台风警告声援在法庭内受审的人。泛民主派立法会议员郭家麒和许智峰都加入声援行列,呼吁香港特首林郑月娥“悬崖勒马”。
另外,数百名示威者周二(7月30日)在一所扣押被捕人士的警署外聚集,要求无条件释放被捕人士。期间数名警员在警署附近出现,被示威者包围,双方发生冲突,一名警员更以枪指向示威者警告。
这是继2016年旺角冲突后再次有示威者被控暴动罪。香港媒体报道,当时有36人被控暴动罪,包括本土派人士梁天琦。他最后被裁定罪名成立,判囚六年。另一名被告卢建民同样被裁定暴动罪成立,判囚七年。
建制派立法会议员叶刘淑仪认为,以暴动罪控告示威者可以对示威活动起阻吓作用。她认为示威者近期每星期都生事,如果他们违法后没有代价,只会鼓励更多人违法。
中国国务院港澳事务办公室发言人周一表示,北京政府坚决支持林郑月娥、香港政府和香港警方,又向坚守岗位的警务人员致以“崇高的敬意”。民主派议员杨岳桥批评,香港警方迅速提告,给人的感觉是要响应北京“坚决支持香港警方严正执法”的指示。
香港特首林郑月娥六月宣布暂缓《逃犯条例》修订,之后更形容修例工作已经“寿终正寝”,但示威者仍然坚持她要正式撤回修例建议,同时成立独立委员会,调查风波中警察滥用权力等指控,香港各处多次抗议中爆发严重警民冲突。
香港政府发出声明指,示威者周日在香港岛西区“进行非法集结”,指他们“破坏社会安宁”,警方多次警告无效,最后采取行动清场。声明最后指出,案件仍然积极调查中,不排除稍后会有更多人被捕。
警方透露,上环冲突被拘捕的人年龄在16至41岁之间。这次被起诉暴动的被告,有13人不足21岁,许多都是学生,其他人包括教师、护士、飞机师及厨师等。
聆讯开始前,法院大楼外边聚集了数百名市民,冒着台风警告声援在法庭内受审的人。泛民主派立法会议员郭家麒和许智峰都加入声援行列,呼吁香港特首林郑月娥“悬崖勒马”。
另外,数百名示威者周二(7月30日)在一所扣押被捕人士的警署外聚集,要求无条件释放被捕人士。期间数名警员在警署附近出现,被示威者包围,双方发生冲突,一名警员更以枪指向示威者警告。
这是继2016年旺角冲突后再次有示威者被控暴动罪。香港媒体报道,当时有36人被控暴动罪,包括本土派人士梁天琦。他最后被裁定罪名成立,判囚六年。另一名被告卢建民同样被裁定暴动罪成立,判囚七年。
建制派立法会议员叶刘淑仪认为,以暴动罪控告示威者可以对示威活动起阻吓作用。她认为示威者近期每星期都生事,如果他们违法后没有代价,只会鼓励更多人违法。
中国国务院港澳事务办公室发言人周一表示,北京政府坚决支持林郑月娥、香港政府和香港警方,又向坚守岗位的警务人员致以“崇高的敬意”。民主派议员杨岳桥批评,香港警方迅速提告,给人的感觉是要响应北京“坚决支持香港警方严正执法”的指示。
香港特首林郑月娥六月宣布暂缓《逃犯条例》修订,之后更形容修例工作已经“寿终正寝”,但示威者仍然坚持她要正式撤回修例建议,同时成立独立委员会,调查风波中警察滥用权力等指控,香港各处多次抗议中爆发严重警民冲突。
香港政府发出声明指,示威者周日在香港岛西区“进行非法集结”,指他们“破坏社会安宁”,警方多次警告无效,最后采取行动清场。声明最后指出,案件仍然积极调查中,不排除稍后会有更多人被捕。
Wednesday, July 24, 2019
कुछ इस तरह बॉलीवुड में हीरो की बनी बनाई परिभाषा तोड़ना चाहती हैं तापसी पन्नू
दशकों से बॉलीवुड में हीरो का मतलब एक जैसा ही रहा है. हालांकि एक्ट्रेस तापसी पन्नू हीरो के इस बने बनाए जेंडर स्टीरियोटाइप को तोड़ना चाहती हैं. 31 साल की तापसी पन्नू मानती हैं कि महिला केंद्रित फिल्मों को इंडस्ट्री और दर्शकों द्वारा खुले दिल से अपनाने के बाद इस तरह का बदलाव लाया जा सकता है.
तापसी ने पीटीआई से एक बातचीत में कहा कि मुझे लगता है कि हीरो का कोई जेंडर नहीं होता है और मैं इसे साबित करने की कोशिश कर रही हूं. हम इतने सालों से अपने दर्शकों को एक बने बनाए ढांचे का हीरो देते आ रहे हैं. मुझे पता है कि ये बदलाव रातोरात नहीं आ सकता है और अभिनेत्रियों को अपनी तरफ से भी सुनिश्चित करना होगा कि वे इस बदलाव में भागीदार बनें.
गौरतलब है कि तापसी की पिछली फिल्म गेम ओवर को क्रिटिक्स ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर पाई. फिल्म में तापसी का मुख्य किरदार था और उन्होंने इस फिल्म से साबित किया था कि फिल्म का सबसे बड़ा हीरो स्क्रिप्ट होती है. हालांकि तापसी को उम्मीद थी कि ये फिल्म कमर्शियल एक सफल फिल्म साबित हो ताकि बाकी लोग भी भविष्य में इन तरह ही फिल्मों के साथ रिस्क उठा सकें.
तापसी पन्नू की पिछली दो रिलीज़ फिल्में बदला और गेम ओवर को क्रिटिक्स का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला. बदला ने तो बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन कारोबार भी किया, लेकिन गेम ओवर कलेक्शन के मामले में खास कमाल नहीं दिखा पाई. तापसी मानती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री एक बदलाव के दौर से गुजर रही हैं और इस स्पेस में सभी अच्छी फिल्मों को अपनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि गेम ओवर एक डार्क फिल्म थी. इस फिल्म में ना तो गाने थे, ना कॉमेडी सीन थे, हालांकि फिल्म की सिनेमाटोग्राफी अच्छी थी. मगर इसके बावजूद लोगों ने इस फिल्म को प्यार दिया. ऐसी फिल्मों को ऑडियन्स से एक ट्रस्ट फैक्टर की दरकार होती है.
एक्ट्रेस ने कहा कि मैं इस दबाव में काम नहीं कर रही हूं कि मुझे एक निश्चित ढांचे में फिट होकर फिल्में करनी हैं ताकि मेरी फिल्में ज्यादा से ज्यादा बिजनेस कर सकें. मैं एक एक्टर के तौर पर अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही हूं.
वर्कफ्रंट की बात करें तो तापसी की दो फिल्में रिलीज़ हो रही हैं. इन फिल्मों का नाम मिशन मंगल और सांड की आंख है. मिशन मंगल में तापसी के साथ अक्षय कुमार, विद्या बालन और नित्या मेनन जैसे सितारे नजर आएंगे. इसके अलावा सांड की आंख में तापसी भूमि पेडनेकर और विनीत कुमार सिंह के साथ दिखाई देंगी. इन फिल्मों के अलावा तापसी एक तमिल एक्शन थ्रिलर में भी काम कर रही हैं.
तापसी ने पीटीआई से एक बातचीत में कहा कि मुझे लगता है कि हीरो का कोई जेंडर नहीं होता है और मैं इसे साबित करने की कोशिश कर रही हूं. हम इतने सालों से अपने दर्शकों को एक बने बनाए ढांचे का हीरो देते आ रहे हैं. मुझे पता है कि ये बदलाव रातोरात नहीं आ सकता है और अभिनेत्रियों को अपनी तरफ से भी सुनिश्चित करना होगा कि वे इस बदलाव में भागीदार बनें.
गौरतलब है कि तापसी की पिछली फिल्म गेम ओवर को क्रिटिक्स ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर पाई. फिल्म में तापसी का मुख्य किरदार था और उन्होंने इस फिल्म से साबित किया था कि फिल्म का सबसे बड़ा हीरो स्क्रिप्ट होती है. हालांकि तापसी को उम्मीद थी कि ये फिल्म कमर्शियल एक सफल फिल्म साबित हो ताकि बाकी लोग भी भविष्य में इन तरह ही फिल्मों के साथ रिस्क उठा सकें.
तापसी पन्नू की पिछली दो रिलीज़ फिल्में बदला और गेम ओवर को क्रिटिक्स का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला. बदला ने तो बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन कारोबार भी किया, लेकिन गेम ओवर कलेक्शन के मामले में खास कमाल नहीं दिखा पाई. तापसी मानती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री एक बदलाव के दौर से गुजर रही हैं और इस स्पेस में सभी अच्छी फिल्मों को अपनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि गेम ओवर एक डार्क फिल्म थी. इस फिल्म में ना तो गाने थे, ना कॉमेडी सीन थे, हालांकि फिल्म की सिनेमाटोग्राफी अच्छी थी. मगर इसके बावजूद लोगों ने इस फिल्म को प्यार दिया. ऐसी फिल्मों को ऑडियन्स से एक ट्रस्ट फैक्टर की दरकार होती है.
एक्ट्रेस ने कहा कि मैं इस दबाव में काम नहीं कर रही हूं कि मुझे एक निश्चित ढांचे में फिट होकर फिल्में करनी हैं ताकि मेरी फिल्में ज्यादा से ज्यादा बिजनेस कर सकें. मैं एक एक्टर के तौर पर अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही हूं.
वर्कफ्रंट की बात करें तो तापसी की दो फिल्में रिलीज़ हो रही हैं. इन फिल्मों का नाम मिशन मंगल और सांड की आंख है. मिशन मंगल में तापसी के साथ अक्षय कुमार, विद्या बालन और नित्या मेनन जैसे सितारे नजर आएंगे. इसके अलावा सांड की आंख में तापसी भूमि पेडनेकर और विनीत कुमार सिंह के साथ दिखाई देंगी. इन फिल्मों के अलावा तापसी एक तमिल एक्शन थ्रिलर में भी काम कर रही हैं.
Thursday, July 4, 2019
Смена власти в ЕС: преемников Юнкеру, Туску и Драги подобрали
Европейский союз сумел уладить разногласия, грозившие параличом власти в крупнейшем экономическом и политическом союзе планеты с населением полмиллиарда человек. После трех дней ожесточенных споров и взаимных обвинений невыспавшиеся лидеры 28 стран ЕС распределили ключевые посты в руководстве блока.
Люксембуржец Жан-Клод Юнкер осенью уступит место главы Еврокомиссии 60-летней немке Урсуле фон дер Ляйен, давнему соратнику канцлера Ангелы Меркель и первой женщине на посту министра обороны Германии.
Пост председателя Европейского центрального банка отойдет второй крупнейшей стране блока - Франции. Итальянец Марио Драги передаст его 63-летней главе Международного валютного фонда Кристин Лагард.
Поляка Дональда Туска во главе Европейского совета сменит 43-летний бельгийский премьер Шарль Мишель. А за внешнюю политику ЕС вместо итальянки Федерики Могерини будет отвечать 72-летний министр иностранных дел Испании, социалист Жозеп Боррель.
ЕС переживает пятилетнюю ротацию начальников после майских выборов в Европарламент, на которых центристы лишились уверенного большинства, что оживило скучную европейскую политику и сместило баланс власти от консерваторов к либералам.
Выборы преемников обнажили сразу несколько расколов в ЕС и поставили под вопрос единство и работоспособность блока, и без того переживающего непростые времена в свете "брексита", подъема национализма и вялого экономического роста.
Трехдневное перетягивание каната первым вывело из себя президента Франции Эммануэля Макрона.
"Мы выставляем в дурном свете и Европейский совет, и Европу. Создается впечатление, что Европа ведет себя несерьезно", - сердился французский лидер после того, как несколько стран пошли ему наперекор.
"Нужно тщательно разобраться в причинах этого провала. Наша репутация решительно запятнана бесконечными заседаниями, которые ничем не заканчиваются", - сказал он и повторил свой майский тезис о том, что он против дальнейшего расширения Евросоюза за счет балканских стран, пока ЕС не будет реформирован, чтобы стать более сплоченным и легче управляемым союзом.
Франция и Германия традиционно делили важнейшие посты в ЕС. Однако голос новых членов союза звучит все увереннее, и на это раз они сумели сорвать планы старших товарищей.
До майских выборов в Европарламент ожидалось, что как и в прошлый раз, Еврокомиссию - исполнительный орган, своего рода правительство ЕС - возглавит кандидат от крупнейшей фракции, либерально-консервативной Европейской народной партии, в которую входят соратники Меркель. Кандидатом был немец Манфред Вебер.
Однако на выборах консерваторы сдали часть позиций на фоне успеха зеленых. Либерал Макрон воспользовался моментом, возглавил сопротивление - и вскоре Вебер уже не был кандидатом.
Спор Франции с Германией продолжался недолго: уходящая Меркель согласилась на компромисс, и в кулуарах встречи "Большой двадцатки" в Осаке на минувших выходных они с Макроном договорились выдвинуть Юнкеру в преемники его первого зама, бывшего министра иностранных дел Нидерландов Франса Тиммерманса.
Но не тут-то было.
Страны Вышеградской четверки - Польша, Венгрия, Чехия и Словакия - выступили резко против. Они давно имеют зуб на Тиммерманса, поскольку именно в его обязанности на посту еврокомиссара входило отчитывать их за попрание европейских ценностей и наступление на свободу слова и независимость судебной системы.
А главное - они решительно расходятся во взглядах на миграцию. И тут их поддержал другой сторонник закрытых границ - тяжеловес европейской политики Италия, у которой разладились отношения с Брюсселем еще и потому, что пришедшие к власти популисты принялись сорить деньгами в нарушение европейских бюджетных правил.
Их общее мнение выразил чешский премьер Андрей Бабиш:
"Он (Тиммерманс) всегда продвигал неприемлемую для нас миграционную политику, поэтому эта кандидатура абсолютно неприемлема. И я не знаю, почему премьеры Франции, Испании, Нидерландов и Германии не могут этого понять".
"Его (Тиммерманса) отвергли за то, что он отстаивал принципы и европейские ценности, защищал положения наших договоров. Это неприемлемо", - сказал он.
Для назначения главы Еврокомиссии кандидату нужно заручиться поддержкой лидеров 21 из 28 стран ЕС, представляющих 65% населения блока. Технически голоса продавить Тиммерманса были, но столь противоречивая фигура могла поставить под вопрос дееспособность исполнительного органа ЕС и только обострить противоречия.
К тому же, раз принципиальная пятерка затеяла драку до последнего, другие недовольные решили поделиться своими сомнениями.
Ирландия, Латвия и Хорватия пеняли на Францию и Германию за то, что они согласовали кандидатуру за их спинами. А консерваторы из Европейской народной партии отказывались поддерживать социалиста Тиммерманса.
"Голосовать против всей Вышеградской группы и против такой страны, как Италия, было бы очень сложно, - сказала она. - На устранение разногласий требуется время. Мы должны понять, что всем придется сделать небольшой шаг навстречу друг другу - и я имею в виду каждого".
И все послушались канцлера.
Решение еще должны утвердить евродепутаты, собравшиеся во вторник на первое заседание. В среду они, как ожидается, выберут председателя Европарламента - самого слабого звена в триаде европейской власти.
В законодательной ветви первую скрипку играет Европейский совет - подобие верхней палаты парламента. Он состоит из глав всех 28 государств ЕС и определяет политику союза.
Европарламент - подобие нижней палаты - его младший партнер. Он не имеет права законодательной инициативы, но наделен надзорными полномочиями, а его согласие необходимо для утверждения бюджета ЕС (170 млрд евро в этом году).
Люксембуржец Жан-Клод Юнкер осенью уступит место главы Еврокомиссии 60-летней немке Урсуле фон дер Ляйен, давнему соратнику канцлера Ангелы Меркель и первой женщине на посту министра обороны Германии.
Пост председателя Европейского центрального банка отойдет второй крупнейшей стране блока - Франции. Итальянец Марио Драги передаст его 63-летней главе Международного валютного фонда Кристин Лагард.
Поляка Дональда Туска во главе Европейского совета сменит 43-летний бельгийский премьер Шарль Мишель. А за внешнюю политику ЕС вместо итальянки Федерики Могерини будет отвечать 72-летний министр иностранных дел Испании, социалист Жозеп Боррель.
ЕС переживает пятилетнюю ротацию начальников после майских выборов в Европарламент, на которых центристы лишились уверенного большинства, что оживило скучную европейскую политику и сместило баланс власти от консерваторов к либералам.
Выборы преемников обнажили сразу несколько расколов в ЕС и поставили под вопрос единство и работоспособность блока, и без того переживающего непростые времена в свете "брексита", подъема национализма и вялого экономического роста.
Трехдневное перетягивание каната первым вывело из себя президента Франции Эммануэля Макрона.
"Мы выставляем в дурном свете и Европейский совет, и Европу. Создается впечатление, что Европа ведет себя несерьезно", - сердился французский лидер после того, как несколько стран пошли ему наперекор.
"Нужно тщательно разобраться в причинах этого провала. Наша репутация решительно запятнана бесконечными заседаниями, которые ничем не заканчиваются", - сказал он и повторил свой майский тезис о том, что он против дальнейшего расширения Евросоюза за счет балканских стран, пока ЕС не будет реформирован, чтобы стать более сплоченным и легче управляемым союзом.
Франция и Германия традиционно делили важнейшие посты в ЕС. Однако голос новых членов союза звучит все увереннее, и на это раз они сумели сорвать планы старших товарищей.
До майских выборов в Европарламент ожидалось, что как и в прошлый раз, Еврокомиссию - исполнительный орган, своего рода правительство ЕС - возглавит кандидат от крупнейшей фракции, либерально-консервативной Европейской народной партии, в которую входят соратники Меркель. Кандидатом был немец Манфред Вебер.
Однако на выборах консерваторы сдали часть позиций на фоне успеха зеленых. Либерал Макрон воспользовался моментом, возглавил сопротивление - и вскоре Вебер уже не был кандидатом.
Спор Франции с Германией продолжался недолго: уходящая Меркель согласилась на компромисс, и в кулуарах встречи "Большой двадцатки" в Осаке на минувших выходных они с Макроном договорились выдвинуть Юнкеру в преемники его первого зама, бывшего министра иностранных дел Нидерландов Франса Тиммерманса.
Но не тут-то было.
Страны Вышеградской четверки - Польша, Венгрия, Чехия и Словакия - выступили резко против. Они давно имеют зуб на Тиммерманса, поскольку именно в его обязанности на посту еврокомиссара входило отчитывать их за попрание европейских ценностей и наступление на свободу слова и независимость судебной системы.
А главное - они решительно расходятся во взглядах на миграцию. И тут их поддержал другой сторонник закрытых границ - тяжеловес европейской политики Италия, у которой разладились отношения с Брюсселем еще и потому, что пришедшие к власти популисты принялись сорить деньгами в нарушение европейских бюджетных правил.
Их общее мнение выразил чешский премьер Андрей Бабиш:
"Он (Тиммерманс) всегда продвигал неприемлемую для нас миграционную политику, поэтому эта кандидатура абсолютно неприемлема. И я не знаю, почему премьеры Франции, Испании, Нидерландов и Германии не могут этого понять".
"Его (Тиммерманса) отвергли за то, что он отстаивал принципы и европейские ценности, защищал положения наших договоров. Это неприемлемо", - сказал он.
Для назначения главы Еврокомиссии кандидату нужно заручиться поддержкой лидеров 21 из 28 стран ЕС, представляющих 65% населения блока. Технически голоса продавить Тиммерманса были, но столь противоречивая фигура могла поставить под вопрос дееспособность исполнительного органа ЕС и только обострить противоречия.
К тому же, раз принципиальная пятерка затеяла драку до последнего, другие недовольные решили поделиться своими сомнениями.
Ирландия, Латвия и Хорватия пеняли на Францию и Германию за то, что они согласовали кандидатуру за их спинами. А консерваторы из Европейской народной партии отказывались поддерживать социалиста Тиммерманса.
"Голосовать против всей Вышеградской группы и против такой страны, как Италия, было бы очень сложно, - сказала она. - На устранение разногласий требуется время. Мы должны понять, что всем придется сделать небольшой шаг навстречу друг другу - и я имею в виду каждого".
И все послушались канцлера.
Решение еще должны утвердить евродепутаты, собравшиеся во вторник на первое заседание. В среду они, как ожидается, выберут председателя Европарламента - самого слабого звена в триаде европейской власти.
В законодательной ветви первую скрипку играет Европейский совет - подобие верхней палаты парламента. Он состоит из глав всех 28 государств ЕС и определяет политику союза.
Европарламент - подобие нижней палаты - его младший партнер. Он не имеет права законодательной инициативы, но наделен надзорными полномочиями, а его согласие необходимо для утверждения бюджета ЕС (170 млрд евро в этом году).
Tuesday, June 25, 2019
西藏酥油茶与美国防弹咖啡:一个鲜为人知的故事
你或许没听说过防弹咖啡(Bulletproof coffee),但你一定听说过西藏的酥油奶茶吧。
酥油茶是西藏的特色饮品。多作为主食与糌粑一起食用,有御寒提神醒脑、生津止渴的作用。它是藏人招待客人的必备食物之一。
但是,防弹咖啡与酥油茶到底有何渊源?下面要讲的就是这样一个故事。
戴夫·亚斯普雷(另译戴夫·阿斯普雷 Dave Asprey)是美国人,现年45岁。他原本是硅谷的一名技术主管,但几年前创造了自己独特的咖啡品牌公司,名叫防弹咖啡(Bulletproof coffee 360)。
防弹咖啡风靡世界,其中粉丝不乏一些美国名人。防弹咖啡品牌的创立也让亚斯普雷成为了一名“成功”的企业家。
但跟其他企业家与众不同的是,亚斯普雷还给自己立下了雄心大志:要活到180岁,而且这并不是玩笑,因为他是非常认真的。
亚斯普雷觉得长寿已不再是什么科幻,自己愿意为实现这个长寿愿望而“献身”。
在许多人眼里,亚斯普雷可能有点“怪”。而他本人也自称是“世界上第一个专业生物黑客”。
所谓生物黑客是指那些试图用科技手段"改善"自己生理状况的人,也就是在我们许多人看来有点发疯的人。
比如,亚斯普雷每隔6个月就抽一次骨髓,然后再把骨髓中的一些干细胞注射回全身。
此外,他还经常呆在冷冻疗法室里,利用液氮冷却剂给身体降温。 同时,他还照摄红外线以及同电极刺激大脑等。
亚斯普雷的这些“长生不老”尝试开销不菲,好在有他的防弹咖啡为他提供经济后盾。
当然,你不必购买亚斯普雷的原装防弹咖啡。你可以用任何咖啡,然后加上任何黄油以及纯椰油来调制这种饮料。
亚斯普雷称防弹咖啡可以帮助改善人们的身心健康。有人说,它还有减肥奇效。
亚斯普雷从2012年开始出售防弹咖啡,据他估计已经售出1.6亿杯防弹咖啡。
总部设在西雅图市的防弹咖啡360吸引了6800万美元的投资,除特色咖啡外,目前业务已经扩展到涵盖食品以及生活用品等多项商品。
2004年,亚斯普雷开启了一趟西藏之旅。促使他到西藏旅行的主要原因是跟他的健康有关。
虽然当时的亚斯普雷在硅谷事业有成,但却是一个体重超常(他最重时体重达到136公斤)、健康不佳的胖子。
为了能改善自己的健康,亚斯普雷希望能到西藏学习打坐。一天,他在爬山途中,有人给他一碗藏民的传统饮料:酥油茶。
喝完这碗酥油茶后,亚斯普雷顿觉神清气爽,已经好久没有这种感觉了。
结束西藏之旅回到加州的家后,亚斯普雷对此念念不忘。于是,他开始炮制自己版本的奶茶。
西藏酥油茶用的是藏区特有的牦牛的奶,加州没有牦牛。他就用类似产品奶油来代替。
同时,亚斯普雷还用咖啡取代了茶,认为咖啡比茶更有效。这样做还嫌有所欠缺,亚斯普雷又添加了富含中链三油甘旨油的纯椰油。
亚斯普雷每天早晨都会喝这种防弹咖啡。他本人称,防弹咖啡“改变了他的生活,让他瘦身45公斤”。
亚斯普雷先在自己博客上分享该饮料的好处,3年后开始在网上出售防弹咖啡的这3种原料。
接下来,开始有人给他投资,其中一个投资者也是美国星巴克咖啡的早期投资人。
2016年,美国连锁精品超市,美国全食超市公司( Whole Foods Market)开始供应防弹咖啡,为该品牌助了一臂之力。
酥油茶是西藏的特色饮品。多作为主食与糌粑一起食用,有御寒提神醒脑、生津止渴的作用。它是藏人招待客人的必备食物之一。
但是,防弹咖啡与酥油茶到底有何渊源?下面要讲的就是这样一个故事。
戴夫·亚斯普雷(另译戴夫·阿斯普雷 Dave Asprey)是美国人,现年45岁。他原本是硅谷的一名技术主管,但几年前创造了自己独特的咖啡品牌公司,名叫防弹咖啡(Bulletproof coffee 360)。
防弹咖啡风靡世界,其中粉丝不乏一些美国名人。防弹咖啡品牌的创立也让亚斯普雷成为了一名“成功”的企业家。
但跟其他企业家与众不同的是,亚斯普雷还给自己立下了雄心大志:要活到180岁,而且这并不是玩笑,因为他是非常认真的。
亚斯普雷觉得长寿已不再是什么科幻,自己愿意为实现这个长寿愿望而“献身”。
在许多人眼里,亚斯普雷可能有点“怪”。而他本人也自称是“世界上第一个专业生物黑客”。
所谓生物黑客是指那些试图用科技手段"改善"自己生理状况的人,也就是在我们许多人看来有点发疯的人。
比如,亚斯普雷每隔6个月就抽一次骨髓,然后再把骨髓中的一些干细胞注射回全身。
此外,他还经常呆在冷冻疗法室里,利用液氮冷却剂给身体降温。 同时,他还照摄红外线以及同电极刺激大脑等。
亚斯普雷的这些“长生不老”尝试开销不菲,好在有他的防弹咖啡为他提供经济后盾。
当然,你不必购买亚斯普雷的原装防弹咖啡。你可以用任何咖啡,然后加上任何黄油以及纯椰油来调制这种饮料。
亚斯普雷称防弹咖啡可以帮助改善人们的身心健康。有人说,它还有减肥奇效。
亚斯普雷从2012年开始出售防弹咖啡,据他估计已经售出1.6亿杯防弹咖啡。
总部设在西雅图市的防弹咖啡360吸引了6800万美元的投资,除特色咖啡外,目前业务已经扩展到涵盖食品以及生活用品等多项商品。
2004年,亚斯普雷开启了一趟西藏之旅。促使他到西藏旅行的主要原因是跟他的健康有关。
虽然当时的亚斯普雷在硅谷事业有成,但却是一个体重超常(他最重时体重达到136公斤)、健康不佳的胖子。
为了能改善自己的健康,亚斯普雷希望能到西藏学习打坐。一天,他在爬山途中,有人给他一碗藏民的传统饮料:酥油茶。
喝完这碗酥油茶后,亚斯普雷顿觉神清气爽,已经好久没有这种感觉了。
结束西藏之旅回到加州的家后,亚斯普雷对此念念不忘。于是,他开始炮制自己版本的奶茶。
西藏酥油茶用的是藏区特有的牦牛的奶,加州没有牦牛。他就用类似产品奶油来代替。
同时,亚斯普雷还用咖啡取代了茶,认为咖啡比茶更有效。这样做还嫌有所欠缺,亚斯普雷又添加了富含中链三油甘旨油的纯椰油。
亚斯普雷每天早晨都会喝这种防弹咖啡。他本人称,防弹咖啡“改变了他的生活,让他瘦身45公斤”。
亚斯普雷先在自己博客上分享该饮料的好处,3年后开始在网上出售防弹咖啡的这3种原料。
接下来,开始有人给他投资,其中一个投资者也是美国星巴克咖啡的早期投资人。
2016年,美国连锁精品超市,美国全食超市公司( Whole Foods Market)开始供应防弹咖啡,为该品牌助了一臂之力。
Sunday, June 16, 2019
РПЦ отказалась от храма в сквере, чтобы "не будить демона гражданской
Русская православная церковь отказалась от строительства храма в сквере у театра драмы в Екатеринбурге после массовых протестов, разгона, задержаний и вмешательства Кремля.
Жители протестовали против застройки общественного пространства культовым сооружением с середины мая, когда в сквере появился забор. Власти бросили против них бойцов Росгвардии и задержали десятки человек, но люди не разошлись.
Шум дошел до Москвы, и президент Владимир Путин предложил взять паузу, опросить жителей - и заставить меньшинство подчиниться большинству. Опрос ВЦИОМ выявил, что большинство (58%) против. Городские власти составили новый список из пяти площадок, и в него опять вошел сквер у театра - правда, при условии уменьшения размеров храма. Осенью они собирались опросить горожан и определить место, однако церковь не стала дожидаться результатов.
"В атмосфере тотальной лжи и обмана даже участок, выбранный открыто и честно большинством горожан, всё равно станет причиной раздора для людей, желающих разбудить древнего демона гражданской междоусобицы", - объяснил решение Екатеринбургской епархии местный митрополит Кирилл.
"Мы бы не хотели давать диаволу такую возможность, а потому с покорностью божественному промыслу, ведущему нас ему одному ведомыми путями, отказываемся от права строить собор святой Екатерины в сквере у драмтеатра", - говорится в послании митрополита.
Церковь согласна купить землю, а не застраивать общественное пространство, сообщила епархия, но предупредила, что терпение на пределе.
"Уступая в очередной раз, мы понимаем, что череда этих уступок не может быть бесконечной. Верующие надеются, что нынешняя уступка - последняя", - говорится в сообщении епархии.
"Мы услышали аргументы защитников сквера от застройки и согласились с тем, что площадка под строительство кафедрального собора не будет располагаться в каком-либо сквере или на территории зелёных насаждений, да и вообще на общественной территории, - цитирует епархия митрополита. - Мы слышали от сторонников сквера, что их протест связан с защитой общественных территорий от застройки и не возник бы, если бы строить начали на выкупленной земле. И хотя мы многократно убеждались, что не стоит верить ни единому их слову, сделаем так, как они хотят в очередной раз".
Жители протестовали против застройки общественного пространства культовым сооружением с середины мая, когда в сквере появился забор. Власти бросили против них бойцов Росгвардии и задержали десятки человек, но люди не разошлись.
Шум дошел до Москвы, и президент Владимир Путин предложил взять паузу, опросить жителей - и заставить меньшинство подчиниться большинству. Опрос ВЦИОМ выявил, что большинство (58%) против. Городские власти составили новый список из пяти площадок, и в него опять вошел сквер у театра - правда, при условии уменьшения размеров храма. Осенью они собирались опросить горожан и определить место, однако церковь не стала дожидаться результатов.
"В атмосфере тотальной лжи и обмана даже участок, выбранный открыто и честно большинством горожан, всё равно станет причиной раздора для людей, желающих разбудить древнего демона гражданской междоусобицы", - объяснил решение Екатеринбургской епархии местный митрополит Кирилл.
"Мы бы не хотели давать диаволу такую возможность, а потому с покорностью божественному промыслу, ведущему нас ему одному ведомыми путями, отказываемся от права строить собор святой Екатерины в сквере у драмтеатра", - говорится в послании митрополита.
Церковь согласна купить землю, а не застраивать общественное пространство, сообщила епархия, но предупредила, что терпение на пределе.
"Уступая в очередной раз, мы понимаем, что череда этих уступок не может быть бесконечной. Верующие надеются, что нынешняя уступка - последняя", - говорится в сообщении епархии.
"Мы услышали аргументы защитников сквера от застройки и согласились с тем, что площадка под строительство кафедрального собора не будет располагаться в каком-либо сквере или на территории зелёных насаждений, да и вообще на общественной территории, - цитирует епархия митрополита. - Мы слышали от сторонников сквера, что их протест связан с защитой общественных территорий от застройки и не возник бы, если бы строить начали на выкупленной земле. И хотя мы многократно убеждались, что не стоит верить ни единому их слову, сделаем так, как они хотят в очередной раз".
Thursday, May 30, 2019
Смерть на Эвересте. Что происходит с нашим телом на высоте 8 км?
Только за последнюю неделю при попытке взобраться на вершину Эвереста погибли 11 человек. Это почти вдвое больше, чем в среднем погибало там ежегодно в последнее десятилетие.
Такой всплеск смертности объясняют плохой погодой, неопытностью альпинистов, слишком большими очередями к вершине и даже возросшей конкуренцией между операторами, которые организуют восхождения.
Однако главная причина одна: наш организм просто не приспособлен к жизни в таких условиях. По мере приближения к вершине дышать становится всё сложнее, и на высоте около 8000 метров над уровнем моря начинается "мертвая зона": концентрация кислорода в воздухе падает настолько, что наше тело в самом буквальном смысле слова начинает медленно умирать - клетка за клеткой.
Катастрофическая нехватка кислорода не только резко повышает риск инсульта или сердечного приступа, но и сильно притупляет чувства, замедляет реакции, мешает адекватно оценивать ситуацию и принимать правильные решения.
Наиболее комфортные условия для нашего организма - на морском побережье и в городах, расположенных на небольшом возвышении. Для сравнения: средняя высота Москвы над уровнем моря - около 130 м, Лондона - 20 м, Нью-Йорка - 57 м.
По мере набора высоты давление уменьшается, и в результате при дыхании в легкие попадает все меньше кислорода. На высоте примерно 3600 м (это выше, чем большинство альпийских горнолыжных курортов) каждый вдох дает организму примерно 60% от его привычного объема - и начинается кислородное голодание.
Вы не заметите, что дышать стало труднее, но у вас начнут проявляться первые признаки горной болезни: слабость, тошнота, головокружение, раздражительность.
В "мертвой зоне" кислорода в воздухе настолько мало, что дышать без специального снаряжения там практически невозможно. Анализы, взятые у четырех альпинистов на высоте 8000 метров, показали, что уровень кислорода в их крови был вчетверо ниже нормальных показателей.
"Такие цифры мы обычно наблюдаем у пациентов, находящихся при смерти", - поясняет изучавший анализы врач Джереми Виндзор, который сам принимал участие в восхождении на Эверест в 2007 году.
Чтобы поддерживать снабжение органов кислородом на привычном уровне, сердце начинает биться чаще - пульс может достигать 140 ударов в минуту. За счет этого резко возрастает риск инфаркта или инсульта.
Американский альпинист Дэвид Брешерс как-то сравнил восхождение на высоту 8 км с затяжной пробежкой, во время которой тебе приходится дышать через соломинку.
От кашля трескаются ребра
Существенно снизить риск помогает акклиматизация. Перед тем как отправиться покорять Эверест, альпинисты медленно приучают свой организм к горной болезни и экстремальным условиям "мертвой зоны".
Официальные рекомендации Принстонского университета предписывают не начинать пеший подъем в гору выше уровня 3000 метров и не подниматься больше, чем на 300 м ежедневно, делая суточный перерыв через каждые три дня.
Однако экспедиции на Эверест рассчитаны только на очень опытных альпинистов и начинаются из базового лагеря, который уже расположен на высоте больше 5000. Это выше любого из альпийских пиков, включая Монблан.
Чтобы хоть немного компенсировать кислородное голодание, организм начинает усиленно производить гемоглобин - белок красных клеток крови, который переносит по телу молекулы кислорода.
Кровь из-за этого становится вязкой, нагрузка на сердце увеличивается еще больше, а у некоторых альпинистов в легких начинает скапливаться жидкость - развивается так называемый высокогорный отек легких.
Помимо общей слабости и повышенной утомляемости, отек приводит к тому, что по ночам человек начинается задыхаться, а приступы удушающего кашля могут быть такими, что трескаются ребра. О том, чтобы продолжить восхождение, не может быть и речи: воздуха не хватает даже тогда, когда человек просто лежит без движения.
Слепота и галлюцинации
В "мертвой зоне" из-за катастрофической нехватки кислорода отекает мозг, что может привести уже не только к головокружению и рвоте. Становится невероятно трудно думать и принимать решения. Многие теряют аппетит, кто-то временно теряет зрение из-за "снежной слепоты".
Самое страшное - когда у людей развивается так называемый высокогорный психоз. Они теряют связь с реальностью и забывают, где находятся. У них начинаются слуховые и визуальные галлюцинации.
Известны случаи, когда альпинисты начинали скидывать с себя одежду (температура у вершины Эвереста составляет минус 20-30 градусов Цельсия) или разговаривать с воображаемыми друзьями.
Такой всплеск смертности объясняют плохой погодой, неопытностью альпинистов, слишком большими очередями к вершине и даже возросшей конкуренцией между операторами, которые организуют восхождения.
Однако главная причина одна: наш организм просто не приспособлен к жизни в таких условиях. По мере приближения к вершине дышать становится всё сложнее, и на высоте около 8000 метров над уровнем моря начинается "мертвая зона": концентрация кислорода в воздухе падает настолько, что наше тело в самом буквальном смысле слова начинает медленно умирать - клетка за клеткой.
Катастрофическая нехватка кислорода не только резко повышает риск инсульта или сердечного приступа, но и сильно притупляет чувства, замедляет реакции, мешает адекватно оценивать ситуацию и принимать правильные решения.
Наиболее комфортные условия для нашего организма - на морском побережье и в городах, расположенных на небольшом возвышении. Для сравнения: средняя высота Москвы над уровнем моря - около 130 м, Лондона - 20 м, Нью-Йорка - 57 м.
По мере набора высоты давление уменьшается, и в результате при дыхании в легкие попадает все меньше кислорода. На высоте примерно 3600 м (это выше, чем большинство альпийских горнолыжных курортов) каждый вдох дает организму примерно 60% от его привычного объема - и начинается кислородное голодание.
Вы не заметите, что дышать стало труднее, но у вас начнут проявляться первые признаки горной болезни: слабость, тошнота, головокружение, раздражительность.
В "мертвой зоне" кислорода в воздухе настолько мало, что дышать без специального снаряжения там практически невозможно. Анализы, взятые у четырех альпинистов на высоте 8000 метров, показали, что уровень кислорода в их крови был вчетверо ниже нормальных показателей.
"Такие цифры мы обычно наблюдаем у пациентов, находящихся при смерти", - поясняет изучавший анализы врач Джереми Виндзор, который сам принимал участие в восхождении на Эверест в 2007 году.
Чтобы поддерживать снабжение органов кислородом на привычном уровне, сердце начинает биться чаще - пульс может достигать 140 ударов в минуту. За счет этого резко возрастает риск инфаркта или инсульта.
Американский альпинист Дэвид Брешерс как-то сравнил восхождение на высоту 8 км с затяжной пробежкой, во время которой тебе приходится дышать через соломинку.
От кашля трескаются ребра
Существенно снизить риск помогает акклиматизация. Перед тем как отправиться покорять Эверест, альпинисты медленно приучают свой организм к горной болезни и экстремальным условиям "мертвой зоны".
Официальные рекомендации Принстонского университета предписывают не начинать пеший подъем в гору выше уровня 3000 метров и не подниматься больше, чем на 300 м ежедневно, делая суточный перерыв через каждые три дня.
Однако экспедиции на Эверест рассчитаны только на очень опытных альпинистов и начинаются из базового лагеря, который уже расположен на высоте больше 5000. Это выше любого из альпийских пиков, включая Монблан.
Чтобы хоть немного компенсировать кислородное голодание, организм начинает усиленно производить гемоглобин - белок красных клеток крови, который переносит по телу молекулы кислорода.
Кровь из-за этого становится вязкой, нагрузка на сердце увеличивается еще больше, а у некоторых альпинистов в легких начинает скапливаться жидкость - развивается так называемый высокогорный отек легких.
Помимо общей слабости и повышенной утомляемости, отек приводит к тому, что по ночам человек начинается задыхаться, а приступы удушающего кашля могут быть такими, что трескаются ребра. О том, чтобы продолжить восхождение, не может быть и речи: воздуха не хватает даже тогда, когда человек просто лежит без движения.
Слепота и галлюцинации
В "мертвой зоне" из-за катастрофической нехватки кислорода отекает мозг, что может привести уже не только к головокружению и рвоте. Становится невероятно трудно думать и принимать решения. Многие теряют аппетит, кто-то временно теряет зрение из-за "снежной слепоты".
Самое страшное - когда у людей развивается так называемый высокогорный психоз. Они теряют связь с реальностью и забывают, где находятся. У них начинаются слуховые и визуальные галлюцинации.
Известны случаи, когда альпинисты начинали скидывать с себя одежду (температура у вершины Эвереста составляет минус 20-30 градусов Цельсия) или разговаривать с воображаемыми друзьями.
Wednesday, May 22, 2019
Стоп-храм. Где кроме Екатеринбурга протестуют против строительства церквей?
Протесты против строительства храма в Екатеринбурге привели к приостановке работ - власти обещают обсудить с жителями альтернативные площадки для строительства. На фоне этих событий протесты против возведения храмов в скверах и парках проходят и в других российских городах. Вот пять примеров.
Протесты в центре Екатеринбурга начались в понедельник, 13 мая, после установки забора вокруг сквера, на месте которого планируется построить храм святой Екатерины. На четвертый день конфликта президент России Владимир Путин предложил урегулировать противостояние проведением опроса горожан.
18 мая губернатор Свердловской области Евгений Куйвашев обратился к жителям с просьбой обсудить альтернативные площадки для строительства храма.
В минувший понедельник администрация Екатеринбурга объявила сбор предложений горожан по возможным площадкам строительства храма. Во вторник, 21 мая, строители начали демонтаж забора.
В других городах также зреют конфликтные ситуации из-за строительства храмов в сложившихся городских пространствах.
Вечером 20 мая в Красносельском районе Петербурга состоялась акция против застройки Южно-Приморского парка. Там, как утверждают активисты, планируется строительство храмового комплекса.
Забор будущей стройплощадки парке взяли под охрану за несколько часов до встречи жителей. Полицейские и районные чиновники расположились возле поклонного креста и информационного стенда.
На стенде было указано, что заказчик работ - приход храма покрова Божией матери. Новый забор вплотную прилегает к территории уже строящегося храма святителя Иоанна Милостивого.
Когда тех, кто пришел подписать петицию в защиту парка, набралось больше полусотни, к людям вышли председатель приходского совета Игорь Александров и настоятель храма протоиерей Валерий Швецов. Они попытались убедить людей, что за серым строительным забором будут проводить работы по благоустройству территории - и даже построят детскую площадку.
Объяснить, почему стройка будет длиться до середины лета 2021 года, они не смогли.
У забора люди договорились, что будут собирать подписи в защиту парка не только во время встречи, но и после нее, а так же дополнительно решили создать петицию в интернете. Коллективное обращение они намерены передать властям Петербурга.
У защитников Южно-Приморского парка есть несколько аргументов. Во-первых, им нужен парк с дорожками, газонами и скамейками. Во-вторых, по их словам, священнослужители не привели в порядок территорию, на которой с 2012 года строят храм святителя Иоанна Милостивого. Она тоже огорожена строительным забором.
Третий аргумент: в соседнем дворе за девятиэтажным домом, напротив которого прошла встреча, есть еще одна церковь - Храм святых равноапостольных Константина и Елены.
Чего юго-западу Петербурга не хватает на самом деле, уверяют противники строительства, так это поликлиник, детских садов, отделений полиции и метро.
Во время встречи жителей полиция только наблюдала и не вмешивалась. Люди в штатском с любительскими камерами снимали происходящее.
Красноярск
К среде, 15 мая, в Екатеринбурге насчитывались десятки задержанных протестующих, несколько человек попали в больницы. На фоне этих событий мэр Красноярска Сергей Еремин сообщил об отказе планов строительства храма на территории сквера между улицей Баумана и Свободным проспектом.
"Прежде всего, это связано с наличием на этой территории сквера и необходимостью сноса зеленых насаждений для строительства храма", - сообщили тогда в пресс-службе мэрии.
Это было скорее формальное решение - об отказе от проекта стало известно в апреле, когда городская комиссия по подготовке проекта правил землепользования порекомендовала отказать Красноярской епархии РПЦ в предоставлении разрешения на строительство. Перед этим на публичных слушаниях красноярцами проголосовали против проекта строительства храма 480 голосами против 218.
Челябинск
В понедельник, 20 мая, стало известно, что администрация Челябинска отложила на неопределенный срок рассмотрение вопроса о строительстве часовни святой Татьяны в сквере напротив Южно-Уральского госуниверситета в центре города.
"Опыт, который был в Екатеринбурге, должен быть изучен. У нас в текущем режиме строительство приостановлено. Мы изучим общее мнение жителей, и потом будет приниматься окончательное решение", - прокомментировал решение мэр города Вадим Елистратов (цитата по "Коммерсанту").
Протесты в центре Екатеринбурга начались в понедельник, 13 мая, после установки забора вокруг сквера, на месте которого планируется построить храм святой Екатерины. На четвертый день конфликта президент России Владимир Путин предложил урегулировать противостояние проведением опроса горожан.
18 мая губернатор Свердловской области Евгений Куйвашев обратился к жителям с просьбой обсудить альтернативные площадки для строительства храма.
В минувший понедельник администрация Екатеринбурга объявила сбор предложений горожан по возможным площадкам строительства храма. Во вторник, 21 мая, строители начали демонтаж забора.
В других городах также зреют конфликтные ситуации из-за строительства храмов в сложившихся городских пространствах.
Вечером 20 мая в Красносельском районе Петербурга состоялась акция против застройки Южно-Приморского парка. Там, как утверждают активисты, планируется строительство храмового комплекса.
Забор будущей стройплощадки парке взяли под охрану за несколько часов до встречи жителей. Полицейские и районные чиновники расположились возле поклонного креста и информационного стенда.
На стенде было указано, что заказчик работ - приход храма покрова Божией матери. Новый забор вплотную прилегает к территории уже строящегося храма святителя Иоанна Милостивого.
Когда тех, кто пришел подписать петицию в защиту парка, набралось больше полусотни, к людям вышли председатель приходского совета Игорь Александров и настоятель храма протоиерей Валерий Швецов. Они попытались убедить людей, что за серым строительным забором будут проводить работы по благоустройству территории - и даже построят детскую площадку.
Объяснить, почему стройка будет длиться до середины лета 2021 года, они не смогли.
У забора люди договорились, что будут собирать подписи в защиту парка не только во время встречи, но и после нее, а так же дополнительно решили создать петицию в интернете. Коллективное обращение они намерены передать властям Петербурга.
У защитников Южно-Приморского парка есть несколько аргументов. Во-первых, им нужен парк с дорожками, газонами и скамейками. Во-вторых, по их словам, священнослужители не привели в порядок территорию, на которой с 2012 года строят храм святителя Иоанна Милостивого. Она тоже огорожена строительным забором.
Третий аргумент: в соседнем дворе за девятиэтажным домом, напротив которого прошла встреча, есть еще одна церковь - Храм святых равноапостольных Константина и Елены.
Чего юго-западу Петербурга не хватает на самом деле, уверяют противники строительства, так это поликлиник, детских садов, отделений полиции и метро.
Во время встречи жителей полиция только наблюдала и не вмешивалась. Люди в штатском с любительскими камерами снимали происходящее.
Красноярск
К среде, 15 мая, в Екатеринбурге насчитывались десятки задержанных протестующих, несколько человек попали в больницы. На фоне этих событий мэр Красноярска Сергей Еремин сообщил об отказе планов строительства храма на территории сквера между улицей Баумана и Свободным проспектом.
"Прежде всего, это связано с наличием на этой территории сквера и необходимостью сноса зеленых насаждений для строительства храма", - сообщили тогда в пресс-службе мэрии.
Это было скорее формальное решение - об отказе от проекта стало известно в апреле, когда городская комиссия по подготовке проекта правил землепользования порекомендовала отказать Красноярской епархии РПЦ в предоставлении разрешения на строительство. Перед этим на публичных слушаниях красноярцами проголосовали против проекта строительства храма 480 голосами против 218.
Челябинск
В понедельник, 20 мая, стало известно, что администрация Челябинска отложила на неопределенный срок рассмотрение вопроса о строительстве часовни святой Татьяны в сквере напротив Южно-Уральского госуниверситета в центре города.
"Опыт, который был в Екатеринбурге, должен быть изучен. У нас в текущем режиме строительство приостановлено. Мы изучим общее мнение жителей, и потом будет приниматься окончательное решение", - прокомментировал решение мэр города Вадим Елистратов (цитата по "Коммерсанту").
Thursday, April 25, 2019
सु्प्रीम कोर्ट ने सीबीआई से मांगी मदद: 5 बड़ी ख़बरें
अदालत न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने और यौन उत्पीड़न के एक मामले में चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ कथित साज़िश करने वाले फ़िक्सर को ढूंढने के लिए जांच एजेंसियों की मदद लेना चाहती है.
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कारोबारी अनिल अंबानी के अवमानना मामले में हेरफ़ेर करने के आरोप में अदालत के ही दो कर्मचारियों को बर्ख़ास्त करने की ख़बर पर भी चिंता ज़ाहिर की.
इस मद्देनज़र जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ़ नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की स्पेशल बेंच ने सीबीआई, आईबी और दिल्ली पुलिस के प्रमुख के साथ बुधवार को बंद कमरे में बैठक की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में शुक्रवार को नामांकन से पहले रोड शो करेंगे.
इसके बाद 26 अप्रैल यानी शुक्रवार को वो नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री का रोड शो छह किलोमीटर लंबा होगा. वाराणसी आने के बाद प्रधानमंत्री का रोड शो लंका स्थित महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ शुरू होगा.
इसके बाद प्रधानमंत्री दशाश्वमेध घाट पहुंचेंगे. यहां बने फ्लोटिंग प्लेटफार्म से गंगा की पूजा करने के बाद भव्य गंगा आरती में शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री के रोड-शो में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
विपक्षी दलों ने मतगणना के वक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से मिलान किए जाने वाले वीवीपैट यानी वोटर वेरीफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू के नेतृत्व में 21 गैर-एनडीए नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में अपने 8 अप्रैल के आदेश की समीक्षा की मांग की है.
कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह हर विधानसभा क्षेत्र में एक वीवीपैट मशीन की संख्या बढ़ाकर पांच करे.
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलाइंस जियो ने भारती एयरटेल को ओवरटेक कर लिया है और भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन गई है.
30.6 करोड़ सब्सक्राइबर वाले जियो अब सिर्फ वोडाफोन-आइडिया से पीछे है. एयरटेल के 28.4 करोड़ सब्सक्राइबर हैं, जबकि वोडाफोन ने घोषणा की है कि दिसंबर 2018 में उसके सब्सक्राइबर 38.7 करोड़ थे.
सूडान में अस्थाई सत्ता चला रही सैन्य परिषद के तीन सबसे विवादित नेताओं ने अपने इस्तीफ़े देने का प्रस्ताव दिया है.
ये तीनों कट्टर इस्लामवादी हैं और सत्ता से हटाए गए पूर्व राष्ट्रपति ओमर अल बशीर के पक्के समर्थक हैं.
प्रदर्शनकारी इन तीनों के प्रशासन से हटने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और सैन्य परिषद के बीच वार्ता के बाद इन्होंने इस्तीफ़े की पेशकश की है.
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सत्ता जल्द ही नागरिकों के हाथों में आ जाए. एक प्रेस वार्ता में सैन्य परिषद के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्ष अधिकतर मुद्दों पर सहमत हो गए हैं और मतभेद ख़त्म करने के लिए साझा समिति बनाने पर भी सहमति बनी है.
दूसरी ओर गुरुवार को व्यापक प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है. हज़ारों प्रदर्शनकारी राजधानी ख़र्तूम पहुंच रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कारोबारी अनिल अंबानी के अवमानना मामले में हेरफ़ेर करने के आरोप में अदालत के ही दो कर्मचारियों को बर्ख़ास्त करने की ख़बर पर भी चिंता ज़ाहिर की.
इस मद्देनज़र जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ़ नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की स्पेशल बेंच ने सीबीआई, आईबी और दिल्ली पुलिस के प्रमुख के साथ बुधवार को बंद कमरे में बैठक की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में शुक्रवार को नामांकन से पहले रोड शो करेंगे.
इसके बाद 26 अप्रैल यानी शुक्रवार को वो नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री का रोड शो छह किलोमीटर लंबा होगा. वाराणसी आने के बाद प्रधानमंत्री का रोड शो लंका स्थित महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ शुरू होगा.
इसके बाद प्रधानमंत्री दशाश्वमेध घाट पहुंचेंगे. यहां बने फ्लोटिंग प्लेटफार्म से गंगा की पूजा करने के बाद भव्य गंगा आरती में शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री के रोड-शो में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
विपक्षी दलों ने मतगणना के वक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से मिलान किए जाने वाले वीवीपैट यानी वोटर वेरीफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्र बाबू नायडू के नेतृत्व में 21 गैर-एनडीए नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में अपने 8 अप्रैल के आदेश की समीक्षा की मांग की है.
कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह हर विधानसभा क्षेत्र में एक वीवीपैट मशीन की संख्या बढ़ाकर पांच करे.
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलाइंस जियो ने भारती एयरटेल को ओवरटेक कर लिया है और भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन गई है.
30.6 करोड़ सब्सक्राइबर वाले जियो अब सिर्फ वोडाफोन-आइडिया से पीछे है. एयरटेल के 28.4 करोड़ सब्सक्राइबर हैं, जबकि वोडाफोन ने घोषणा की है कि दिसंबर 2018 में उसके सब्सक्राइबर 38.7 करोड़ थे.
सूडान में अस्थाई सत्ता चला रही सैन्य परिषद के तीन सबसे विवादित नेताओं ने अपने इस्तीफ़े देने का प्रस्ताव दिया है.
ये तीनों कट्टर इस्लामवादी हैं और सत्ता से हटाए गए पूर्व राष्ट्रपति ओमर अल बशीर के पक्के समर्थक हैं.
प्रदर्शनकारी इन तीनों के प्रशासन से हटने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और सैन्य परिषद के बीच वार्ता के बाद इन्होंने इस्तीफ़े की पेशकश की है.
प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सत्ता जल्द ही नागरिकों के हाथों में आ जाए. एक प्रेस वार्ता में सैन्य परिषद के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्ष अधिकतर मुद्दों पर सहमत हो गए हैं और मतभेद ख़त्म करने के लिए साझा समिति बनाने पर भी सहमति बनी है.
दूसरी ओर गुरुवार को व्यापक प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है. हज़ारों प्रदर्शनकारी राजधानी ख़र्तूम पहुंच रहे हैं.
Thursday, April 11, 2019
ओवैसी भाषण भड़काऊ देते हैं, पर उन्हें मुस्लिम नेता कहलाना पसंद नहीं
चार मीनार के पास घनी आबादी वाली एक बस्ती। सड़क के दोनों तरफ छोटे-मोटे कारोबार करने वालों की दुकानें हैं। एक तरफ एक मस्जिद है, दूसरी तरफ इस्लामिक लाइब्रेरी एंड रीडिंग रूम का बोर्ड। इन सबके बीच बाज़ार में एक स्टेज खड़ा कर दिया गया है। मंच पर वक्ता गरमा-गरम तकरीरें कर रहे हैं। नीचे कुर्सियों पर बैठे श्रोता जुमला पसंद आने पर ‘नाराए तकबीर, अल्लाहो अकबर’ के नारे लगाते हैं।
पर ये सब टाइम पास वक्ता हैं। लोगों को मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी का इंतज़ार है, जो हैदराबाद से सांसद हैं, और जोशीले, चुटीले और लच्छेदार भाषणों के लिए मशहूर हैं। पर उसके पहले उनके छोटे भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी तशरीफ़ लाते हैं, जो अभद्र भाषा और भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्ख़ियों में रहते हैं।
उनका भाषण ख़त्म होते-होते मीटिंग में एक बिजली सी दौड़ जाती है। असदुद्दीन ओवैसी आ चुके हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कुर्सियों पर खड़े हो जाते हैं। ओवैसी लोगों को धार्मिक नारे लगाने के लिए झिड़कते हैं। पर वे उन्हें निराश भी नहीं करते। शुरुआत में ही वे अपने उस विवादास्पद भाषण का जिक्र करते हैं जिसमें पुलवामा हमले के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि लगता है कि वे ‘बड़े की बिरयानी खाकर सो गए थे।’
‘लोगां मेरे कू बोला कि वो गोश्त नहीं खाते। अब मेरे को क्या मालूम कि क्या खाते। चलो, मान लिया भाई। तो अब मैं पूछता, क्या वे ढोकला खाकर सो गए थे? इडली बड़ा खाकर सो गए थे? वेजिटेबल बिरयानी खाकर सो गए थे?’ ‘नरेंदर मोदी ने जेट एयरवेज के नरेश गोयल को स्टेट बैंक का 1500 करोड़ दे दिया। बाप की जागीर है? देश के पैसे पर महबूब की मदद! मैं बोलां बाप के जागीर, तो इसपर बोलेंगे। मैं तो बोलेंगा। क्या करते तुम?’
हैदराबाद लोक सभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग आधी है। वे ओवैसी के ऐसे ही बोलों पर फिदा हैं। 49 साल के ओवैसी दो बार विधान सभा और तीन दफा लोक सभा जीत चुके हैं। 1984 से मजलिस ने क्षेत्र में आज तक कभी हार का मुंह नहीं देखा। असदुद्दीन के पहले उनके वालिद एमपी थे।
ओवैसी कहते हैं, ‘मैं अपने को केवल मुस्लिम नेता के रूप में नहीं देखता हूं।’ लंदन से बैरिस्टरी पढ़े ओवैसी इस्लामिक स्टेट को ‘जहन्नुम के कुत्ते’ कह चुके हैं और अपने आप को ‘ख्वाजा अजमेरी की जमीन की हिंदुस्तान की साझा संस्कृति’ का नुमाइंदा मानते हैं। पर भड़काऊ भाषणों की वजह से उनकी तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से होती है। यही वजह है कि उनकी पार्टी को हैदराबाद के बाहर आजतक कोई खास कामयाबी नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी दूसरी बार भागलपुर आए। इससे पहले वे 2015 में भागलपुर आए थे। तब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पीएम इन वेटिंग रहते 2014 में उन्होंने सैंडिस कंपाउंड में सभा को संबोधित किया था।
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।
पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।
यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।
पर ये सब टाइम पास वक्ता हैं। लोगों को मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी का इंतज़ार है, जो हैदराबाद से सांसद हैं, और जोशीले, चुटीले और लच्छेदार भाषणों के लिए मशहूर हैं। पर उसके पहले उनके छोटे भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी तशरीफ़ लाते हैं, जो अभद्र भाषा और भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्ख़ियों में रहते हैं।
उनका भाषण ख़त्म होते-होते मीटिंग में एक बिजली सी दौड़ जाती है। असदुद्दीन ओवैसी आ चुके हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कुर्सियों पर खड़े हो जाते हैं। ओवैसी लोगों को धार्मिक नारे लगाने के लिए झिड़कते हैं। पर वे उन्हें निराश भी नहीं करते। शुरुआत में ही वे अपने उस विवादास्पद भाषण का जिक्र करते हैं जिसमें पुलवामा हमले के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि लगता है कि वे ‘बड़े की बिरयानी खाकर सो गए थे।’
‘लोगां मेरे कू बोला कि वो गोश्त नहीं खाते। अब मेरे को क्या मालूम कि क्या खाते। चलो, मान लिया भाई। तो अब मैं पूछता, क्या वे ढोकला खाकर सो गए थे? इडली बड़ा खाकर सो गए थे? वेजिटेबल बिरयानी खाकर सो गए थे?’ ‘नरेंदर मोदी ने जेट एयरवेज के नरेश गोयल को स्टेट बैंक का 1500 करोड़ दे दिया। बाप की जागीर है? देश के पैसे पर महबूब की मदद! मैं बोलां बाप के जागीर, तो इसपर बोलेंगे। मैं तो बोलेंगा। क्या करते तुम?’
हैदराबाद लोक सभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग आधी है। वे ओवैसी के ऐसे ही बोलों पर फिदा हैं। 49 साल के ओवैसी दो बार विधान सभा और तीन दफा लोक सभा जीत चुके हैं। 1984 से मजलिस ने क्षेत्र में आज तक कभी हार का मुंह नहीं देखा। असदुद्दीन के पहले उनके वालिद एमपी थे।
ओवैसी कहते हैं, ‘मैं अपने को केवल मुस्लिम नेता के रूप में नहीं देखता हूं।’ लंदन से बैरिस्टरी पढ़े ओवैसी इस्लामिक स्टेट को ‘जहन्नुम के कुत्ते’ कह चुके हैं और अपने आप को ‘ख्वाजा अजमेरी की जमीन की हिंदुस्तान की साझा संस्कृति’ का नुमाइंदा मानते हैं। पर भड़काऊ भाषणों की वजह से उनकी तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से होती है। यही वजह है कि उनकी पार्टी को हैदराबाद के बाहर आजतक कोई खास कामयाबी नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी दूसरी बार भागलपुर आए। इससे पहले वे 2015 में भागलपुर आए थे। तब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पीएम इन वेटिंग रहते 2014 में उन्होंने सैंडिस कंपाउंड में सभा को संबोधित किया था।
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के सात चरण में से पहले चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। दोपहर 3 बजे तक उत्तरप्रदेश की आठ सीटों पर 51%, बंगाल में 70% और बिहार में 42% मतदान हुआ। वहीं, महाराष्ट्र में 46.13% और बिहार में 42% वोट डाले गए। पहले चरण में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटें शामिल हैं। कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनका फैसला 14 करोड़ 20 लाख 54 हजार 978 मतदाता करेंगे। इनमें 7 करोड़ 21 लाख पुरुष मतदाता, 6 करोड़ 98 लाख महिला मतदाता हैं। इनके लिए 1.70 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
पहले चरण में 10 राज्यों की सभी सीटों पर आज मतदान पूरा हो जाएगा। वहीं, आंध्रप्रदेश विधानसभा की सभी 175, अरुणाचल प्रदेश की सभी 60, सिक्किम की सभी 32 और ओडिशा की 147 में से 28 विधानसभा सीटों के लिए भी वोटिंग जारी है।
पहले चरण में 91 में से 33 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां सीधा मुकाबला भाजपा-कांग्रेस या एनडीए-यूपीए के बीच है। इनमें सबसे ज्यादा 7 सीटें महाराष्ट्र की हैं। पांच-पांच सीटें असम और उत्तराखंड और चार सीटें बिहार की हैं। वहीं, 35 ऐसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे तीन से चार मुख्य दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 सीटें आंध्र की हैं। वहां तेदेपा, वाईएसआरसीपी, भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। आंध्र में 3 करोड़ 93 लाख वोटर हैं। वहीं, 8 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं, जहां भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा-रालोद ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है।
2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन 91 में से 7 और कांग्रेस ने 55 सीटें जीती थीं। 2014 में यह तस्वीर बदल गई। कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को 25 सीटों का फायदा हुआ और वह 32 के आंकड़े तक पहुंच गई। पहले चरण की इन 91 सीटों पर पिछली बार कांग्रेस से ज्यादा सफल तेदेपा (16) और टीआरएस (11) रही थी।
यहां केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कांग्रेस के नाना पटोले के बीच मुकाबला है। पटोले 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। नागपुर में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। कुनबी और बंजारा समुदाय के वोटर भी हैं जो निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इसी शहर से हैं।
Wednesday, April 3, 2019
नीतीश बोले- लालू जेल से फोन पर सियासत करते हैं, फिर उनके कमरे की 4 दिन में दूसरी बार तलाशी हुई
रांची. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को कहा कि लालू प्रसाद यादव जेल से फोन पर सियासत करते हैं। इसके बाद रांची जिला प्रशासन हरकत में आया और रिम्स में भर्ती लालू के पेइंग वार्ड (नंबर-10) की आधे घंटे तक तलाशी ली। लालू के वार्ड की यह चार दिनों में दूसरी तलाशी थी। हालांकि, अधिकारियों को जांच में कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला।
तलाशी के बाद पुलिस अधिकारियों ने रिम्स के निदेशक दिनेश कुमार सिंह से मुलाकात की और सुरक्षा को लेकर सुझाव दिए। तैनात सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया गया कि बिना जेल सुपरिटेंडेंट की अनुमति के कोई भी वार्ड में प्रवेश नहीं कर सकता।
7 महीने से अस्पताल में भर्ती हैं लालू
लालू पिछले साल अगस्त से ही खराब स्वास्थ्य के चलते रिम्स में भर्ती हैं। चारा घोटाला में दोषी पाए जाने के बाद यह पहली बार है जब राजद उनके बिना लोकसभा चुनाव में उतर रही है। पार्टी की कमान फिलहाल उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव संभाल रहे हैं। बिहार में लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होने हैं। नतीजे 23 मई को आएंगे।
सिर्फ दो लोगों को साथ रहने की है अनुमति
लालू प्रसाद के साथ अभी दो लोगों को साथ रहने की अनुमति है। एक उनके खाने-पीने का और दूसरा उनकी दवाओं का ध्यान रखता है। लालू की सुरक्षा में दो शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी तैनात रहते हैं। एक शिफ्ट में करीब 25 सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी वहां तैनात रहते हैं।
इससे पहले शनिवार को भी सदर डीएसपी और सिटी डीएसपी ने रिम्स के पेइंग वार्ड में लालू के वार्ड की जांच की थी। उस दिन भी तलाशी करीब आधे घंटे तक चली थी।
लालू के वार्ड की सुरक्षा बढ़ाई : रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती लालू प्रसाद की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वार्ड की घेराबंदी कर दी गई है। स्कैनर लगा दिया गया है। स्कैनर से होकर ही डॉक्टर और सेवादारों को जाने की अनुमति है। सेवादारों को पुलिस ने निर्देश दिया है कि वह सामान और खाना सुरक्षाकर्मियों को दे दें। कमरे में जाने की जरूरत नहीं है।
दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं : 71 साल के लालू प्रसाद यादव दिसंबर 2017 से जेल में हैं। हालांकि, इस बीच लालू को इलाज के लिए हाईकोर्ट से कई बार जमानत भी मिल चुकी है। हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2018 को उनकी जमानत खारिज करते हुए 30 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से लालू रिम्स में इलाजरत हैं।
हरबिंदर सिंह भूपाल, मोगा. आधा हिन्दुस्तान की सीरीज में आज मिलिए हरमनप्रीत कौर से। भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान। हरमन को क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से 2017 में अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। हरमन देश की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में शतक लगाया है। चुनाव के मद्देनजर भास्कर ने जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा- महिलाओं की समस्या का एक ही हल है। उन्हें राजनीति में 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।
महिलाओं के मन की बात क्या है?
महिलाओं के मन में भी देश की खुशहाली ही बसती है। लेकिन इसके बीच महिलाओं के हकों की सुरक्षा भी जरूरी हैं। जो इस तरह की सोच रखे, उन्हीं नेताओं को ही वोट मिलने चाहिए।
एक ओर सबरीमाला विवाद है... दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े बड़े फैसले हैं। क्या ये महिला वोटर्स को आकर्षित करते हैं?
फर्क इससे पड़ता है कि ऐसे कितने फैसले लागू हो पाते हैं।
इस चुनाव में पार्टी देखेंगी या प्रधानमंत्री पद का चेहरा?
न दल, न चेहरा। दोनों ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। मैं तो सिर्फ इतना देखूंगी कि देश को एक साथ जोड़कर आगे कौन ले जा सकता है।
तलाशी के बाद पुलिस अधिकारियों ने रिम्स के निदेशक दिनेश कुमार सिंह से मुलाकात की और सुरक्षा को लेकर सुझाव दिए। तैनात सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया गया कि बिना जेल सुपरिटेंडेंट की अनुमति के कोई भी वार्ड में प्रवेश नहीं कर सकता।
7 महीने से अस्पताल में भर्ती हैं लालू
लालू पिछले साल अगस्त से ही खराब स्वास्थ्य के चलते रिम्स में भर्ती हैं। चारा घोटाला में दोषी पाए जाने के बाद यह पहली बार है जब राजद उनके बिना लोकसभा चुनाव में उतर रही है। पार्टी की कमान फिलहाल उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव संभाल रहे हैं। बिहार में लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होने हैं। नतीजे 23 मई को आएंगे।
सिर्फ दो लोगों को साथ रहने की है अनुमति
लालू प्रसाद के साथ अभी दो लोगों को साथ रहने की अनुमति है। एक उनके खाने-पीने का और दूसरा उनकी दवाओं का ध्यान रखता है। लालू की सुरक्षा में दो शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी तैनात रहते हैं। एक शिफ्ट में करीब 25 सुरक्षाकर्मी और पदाधिकारी वहां तैनात रहते हैं।
इससे पहले शनिवार को भी सदर डीएसपी और सिटी डीएसपी ने रिम्स के पेइंग वार्ड में लालू के वार्ड की जांच की थी। उस दिन भी तलाशी करीब आधे घंटे तक चली थी।
लालू के वार्ड की सुरक्षा बढ़ाई : रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती लालू प्रसाद की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वार्ड की घेराबंदी कर दी गई है। स्कैनर लगा दिया गया है। स्कैनर से होकर ही डॉक्टर और सेवादारों को जाने की अनुमति है। सेवादारों को पुलिस ने निर्देश दिया है कि वह सामान और खाना सुरक्षाकर्मियों को दे दें। कमरे में जाने की जरूरत नहीं है।
दिसंबर 2017 से जेल में बंद हैं : 71 साल के लालू प्रसाद यादव दिसंबर 2017 से जेल में हैं। हालांकि, इस बीच लालू को इलाज के लिए हाईकोर्ट से कई बार जमानत भी मिल चुकी है। हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2018 को उनकी जमानत खारिज करते हुए 30 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से लालू रिम्स में इलाजरत हैं।
हरबिंदर सिंह भूपाल, मोगा. आधा हिन्दुस्तान की सीरीज में आज मिलिए हरमनप्रीत कौर से। भारतीय महिला टी-20 टीम की कप्तान। हरमन को क्रिकेट में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से 2017 में अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। हरमन देश की पहली ऐसी महिला क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में शतक लगाया है। चुनाव के मद्देनजर भास्कर ने जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा- महिलाओं की समस्या का एक ही हल है। उन्हें राजनीति में 50 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए।
महिलाओं के मन की बात क्या है?
महिलाओं के मन में भी देश की खुशहाली ही बसती है। लेकिन इसके बीच महिलाओं के हकों की सुरक्षा भी जरूरी हैं। जो इस तरह की सोच रखे, उन्हीं नेताओं को ही वोट मिलने चाहिए।
एक ओर सबरीमाला विवाद है... दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े बड़े फैसले हैं। क्या ये महिला वोटर्स को आकर्षित करते हैं?
फर्क इससे पड़ता है कि ऐसे कितने फैसले लागू हो पाते हैं।
इस चुनाव में पार्टी देखेंगी या प्रधानमंत्री पद का चेहरा?
न दल, न चेहरा। दोनों ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। मैं तो सिर्फ इतना देखूंगी कि देश को एक साथ जोड़कर आगे कौन ले जा सकता है।
Thursday, March 21, 2019
समझौता ब्लास्ट में सभी आरोपी बरी होने पर भड़का पाकिस्तान, भारत ने दिया जवाब
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की पंचकूला विशेष अदालत ने फरवरी 2007 में समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट के मामले में हिंदू नेता स्वामी असीमानंद समेत सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया.सभी चारों आरोपियों को बरी करने पर पाकिस्तान ने भारत के सामने कड़ा विरोध जताया है.
पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को बुलाकर आरोपियों को बरी करने पर आपत्ति जताई. इसका जवाब देते हुए भारत ने साफ किया कि हमारी न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी है. सभी सबूतों और गवाहों के मद्देनजर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. भारत ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान खुद नहीं सहयोग कर रहा था. गवाहों का भेजा गया समन पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने वापस भेज दिया था.
18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के पास ट्रेन में हुए इस बम विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे, इनमें 43 पाकिस्तानी, 10 भारतीय और 15 अज्ञात लोग थे. 10 पाकिस्तानियों समेत कई लोग घायल भी हुए थे.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत के हाई कमिश्नर के खिलाफ इस मामले को विरोधस्वरूप उठाया गया और समझौता ब्लास्ट केस में सभी आरोपियों के रिहा होने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है.
NIA की अदालत ने जनवरी 2014 में असीमानंद, कमल चौहान, राजिंदर चौधरी और लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप तय किए थे, इन सभी पर हत्या, देशद्रोह, हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश के आरोप थे. शुरुआत में हरियाणा पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन जुलाई 2010 को जांच एनआईए को सौंप दिया गया. समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में पहली चार्जशीट 2011 में फाइल की गई. इसके बाद 2012 और 2013 में भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई.
बुधवार को एनआईए की अदालत ने इस केस में पहले पाकिस्तानी महिला राहिला वकील की याचिका खारिज की और उसके बाद अपना फैसला सुनाया. विशेष अदालत ने राहिला की याचिका सीआरसीपीसी की धारा 311 के तहत खारिज कर दिया. बता दें, 14 मार्च को ही इस मामले में फैसला सुनाया जाना था. लेकिन इससे ठीक पहले राहिला ने ईमेल के माध्यम से याचिका दायर कर दी, जिसके बाद कोर्ट ने फैसला टाल दिया था. राहिला ने अपने वकील मोमिन मलिक के माध्यम से कहा था कि वह मामले में गवाही देना चाहती हैं. राहिला के पिता की विस्फोट में मौत हुई थी.
राहिला ने याचिका में जिक्र किया था कि पाकिस्तान के पीड़ित परिवारों को गवाही देने का अवसर नहीं मिला है और न ही उन तक समन तामील हुए हैं. ऐसे में एक बार उन्हें गवाही का मौका दिया जाए. वहीं कोर्ट में NIA के वकील ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि NIA की ओर से जो 13 पाकिस्तानी गवाहों की लिस्ट दी गई थी, उसमें राहिला वकील का नाम नहीं था. इस केस में बहस होने के बाद अदालत ने 6 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
यह एक आतंकवादी घटना थी, जिसमें 18 फरवरी, 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट किया गया था. यह ट्रेन दिल्ली से अटारी पाकिस्तान जा रही थी. ट्रेन रात के 10.50 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी. इसमें 16 कोच थे. ब्लास्ट 2 अनारक्षित कोच में हुआ था. जांच में पता चला है कि 4 IED प्लांट किए गए थे, जिनमें 2 ब्लास्ट हुए थे. इस केस में स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया गया था, जिन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2015 में जमानत दे दी थी.
भारतीय दंड संहिता की धारा 354 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है. जहां स्त्री की मर्यादा और मान सम्मान को क्षति पहुंचाने के लिए उनके साथ जोर जबरदस्ती की जाए. उनको गलत नीयत से छुआ जाए. या उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाए या फिर बुरी नीयत से हमला किया जाए. गलत मंशा के साथ महिलाओं से किया गया बर्ताव भी इसी धारा के दायरे में आता है.
भारतीय दंड संहिता के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की मर्यादा को भंग करने के लिए उस पर हमला या जोर जबरदस्ती करता है, तो उस पर आईपीसी की धारा 354 लगाई जाती है. जिसके तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है.
बच्चों के साथ जोर जबरदस्ती या छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है. ये शब्द अंग्रेजी से आता है. इसका पूर्णकालिक मतलब होता है प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012. इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है.
पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को बुलाकर आरोपियों को बरी करने पर आपत्ति जताई. इसका जवाब देते हुए भारत ने साफ किया कि हमारी न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी है. सभी सबूतों और गवाहों के मद्देनजर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. भारत ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान खुद नहीं सहयोग कर रहा था. गवाहों का भेजा गया समन पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने वापस भेज दिया था.
18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के पास ट्रेन में हुए इस बम विस्फोट में 68 लोग मारे गए थे, इनमें 43 पाकिस्तानी, 10 भारतीय और 15 अज्ञात लोग थे. 10 पाकिस्तानियों समेत कई लोग घायल भी हुए थे.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत के हाई कमिश्नर के खिलाफ इस मामले को विरोधस्वरूप उठाया गया और समझौता ब्लास्ट केस में सभी आरोपियों के रिहा होने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है.
NIA की अदालत ने जनवरी 2014 में असीमानंद, कमल चौहान, राजिंदर चौधरी और लोकेश शर्मा के खिलाफ आरोप तय किए थे, इन सभी पर हत्या, देशद्रोह, हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश के आरोप थे. शुरुआत में हरियाणा पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन जुलाई 2010 को जांच एनआईए को सौंप दिया गया. समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में पहली चार्जशीट 2011 में फाइल की गई. इसके बाद 2012 और 2013 में भी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई.
बुधवार को एनआईए की अदालत ने इस केस में पहले पाकिस्तानी महिला राहिला वकील की याचिका खारिज की और उसके बाद अपना फैसला सुनाया. विशेष अदालत ने राहिला की याचिका सीआरसीपीसी की धारा 311 के तहत खारिज कर दिया. बता दें, 14 मार्च को ही इस मामले में फैसला सुनाया जाना था. लेकिन इससे ठीक पहले राहिला ने ईमेल के माध्यम से याचिका दायर कर दी, जिसके बाद कोर्ट ने फैसला टाल दिया था. राहिला ने अपने वकील मोमिन मलिक के माध्यम से कहा था कि वह मामले में गवाही देना चाहती हैं. राहिला के पिता की विस्फोट में मौत हुई थी.
राहिला ने याचिका में जिक्र किया था कि पाकिस्तान के पीड़ित परिवारों को गवाही देने का अवसर नहीं मिला है और न ही उन तक समन तामील हुए हैं. ऐसे में एक बार उन्हें गवाही का मौका दिया जाए. वहीं कोर्ट में NIA के वकील ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि NIA की ओर से जो 13 पाकिस्तानी गवाहों की लिस्ट दी गई थी, उसमें राहिला वकील का नाम नहीं था. इस केस में बहस होने के बाद अदालत ने 6 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
यह एक आतंकवादी घटना थी, जिसमें 18 फरवरी, 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट किया गया था. यह ट्रेन दिल्ली से अटारी पाकिस्तान जा रही थी. ट्रेन रात के 10.50 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी. इसमें 16 कोच थे. ब्लास्ट 2 अनारक्षित कोच में हुआ था. जांच में पता चला है कि 4 IED प्लांट किए गए थे, जिनमें 2 ब्लास्ट हुए थे. इस केस में स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया गया था, जिन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2015 में जमानत दे दी थी.
भारतीय दंड संहिता की धारा 354 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है. जहां स्त्री की मर्यादा और मान सम्मान को क्षति पहुंचाने के लिए उनके साथ जोर जबरदस्ती की जाए. उनको गलत नीयत से छुआ जाए. या उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाए या फिर बुरी नीयत से हमला किया जाए. गलत मंशा के साथ महिलाओं से किया गया बर्ताव भी इसी धारा के दायरे में आता है.
भारतीय दंड संहिता के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की मर्यादा को भंग करने के लिए उस पर हमला या जोर जबरदस्ती करता है, तो उस पर आईपीसी की धारा 354 लगाई जाती है. जिसके तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है.
बच्चों के साथ जोर जबरदस्ती या छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है. ये शब्द अंग्रेजी से आता है. इसका पूर्णकालिक मतलब होता है प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012. इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है.
Thursday, March 7, 2019
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस बुझा रही जंगलों की आग
पिछले साल कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में भयंकर आग लगी थी. इससे भारी नुक़सान हुआ था. हवा में नमी न होने की वजह से आग बड़ी तेज़ी से और दूर-दूर तक इलाके तक फैल गई थी.
कैलिफ़ोर्निया में 2018 में आग लगने की 8527 घटनाएं हुई थीं. इसकी सीधा असर 18 लाख, 93 हज़ार 913 एकड़ ज़मीन पर असर पड़ा था. आग की वजह से कैलिफ़ोर्निया के पैराडाइज़ क़स्बे में 86 लोगों की मौत हो गई.
जंगल में भयंकर आग लगने का शिकार सिर्फ़ अमरीका का कैलिफ़ोर्निया सूबा हुआ हो, ऐसा नहीं है. 2018 में यूनान के समुद्र तट से लेकर ऑस्ट्रेलिया के जंगलों और ब्रिटेन तक जंगल की आग भड़की थी. यहां तक कि आर्कटिक जैसे सर्द इलाक़े में भी आग भड़क उठी थी.
आग लगने की इन घटनाओं को जलवायु परिवर्तन का नतीजा बताया जा रहा है. अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि आगे चलकर इंसानी सभ्यता ऐसी और भी घटनाओं के शिकार होंगे. ऐसे हालात से निपटने में हमें आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मदद कर सकता है.
तेज़ी से भड़की आग को क़ाबू करना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इस काम में सिर्फ़ जानकारों की मदद से आसानी नहीं होगी. इसीलिए आग का दायरा बढ़ने से रोकने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है.
अमरीका के सैन फ्रांसिस्को की कंपनी सिल्वियाटेरा इसी काम में लगी है. सिल्वियाटेरा मशीनी अक़्ल की मदद से जंगलों की मैपिंग करती है और संसाधनों को मुहैया कराती है, ताकि जंगल की आग से नुक़सान को कम से कम किया जा सके.
कंपनी की अधिकारी नैन पॉन्ड बताती हैं कि, "हम रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट से ज़मीनी आंकड़े जुटाते हैं. फिर इनकी मदद से आग भड़कने के पूर्वानुमान लगाते हैं."
जंगलों के विस्तार का आकलन
नैन पॉन्ड की टीम सैटेलाइट के अलावा ड्रोन और हेलीकॉप्टर से ली गई तस्वीरों के आधार पर भी जंगलों के विस्तार का आकलन करती है. इलाक़े में पाए जाने वाले पेड़-पौधों के आधार पर ये अंदाज़ा लगाया जाता है कि आग कितनी तेज़ी से और कितने बड़े इलाक़े में फैले सकती है.
सिल्वियाटेरा इस वक़्त अमरीका के 30 करोड़ हेक्टेयर इलाक़े में फैले जंगलों से जुड़े आंकड़े जुटा रही है. जब ये नक़्शा तैयार हो जाएगा, तो मशीन की मदद से आग के ज़्यादा जोखिम वाले इलाक़े की पहचान की जाएगी.
जोखिम का अंदाज़ा किसी ख़ास हिस्से में पाये जाने वाले पेड़-पौधों और झाड़ियों की क़िस्म, उनके घनत्व और जलने की क्षमता का आकलन कर के लगाया जाता है.
चीड़ जैसे कुछ पेड़ होते हैं, जो ज़्यादा जल्दी आग पकड़ लेते हैं. जंगल के पेड़-पौधों के आग पकड़ने की आशंका का अनुमान लगाने में उनकी मोटी छाल से लेकर दरख़्तों में मौजूद तेल का अनुपात तक असर डालता है. पत्तियां कितनी घनी हैं, ये बात भी आग के फैलने में काफ़ी मायने रखती है.
इससे पहले होता ये था कि जंगल में कुछ पेड़ों के नमूने लेकर अंदाज़न ये तय किया जाता था कि किस इलाक़े में आग तेज़ी से फैलेगी और किस जगह इसका असर कम पड़ेगा.
मगर, अब आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसका सटीक अनुमान लगाया जा सकता है. सिल्वियाटेरा जैसी कंपनियां जंगलों को लेकर सच्चाई के बेहद क़रीब पहुंच पाने वाले आंकड़े जुटा रही हैं.
ऐसे आंकड़ों की मदद से ही कैलिफ़ोर्निया के पैराडाइज़ इलाक़े में किस तरह आग तेज़ फैलेगी और किधर धीमी गति से बढ़ेगी, ये पता लगाया जा सका है. ज़्यादा जोखिम वाले इलाक़ों को नक़्शे में लाल रंग से चिह्नित किया जाता है. वहां पर आग रोकने के ज़्यादा पुख़्ता इंतज़ाम किए जाते हैं. हालांकि ये काम बहुत पेचीदा है.
थ्री डी मॉडल की मदद
नैन पॉन्ड कहती हैं, "हमें ये भी देखना पड़ता है कि जंगल से हमें कितने संसाधन मिलते हैं. जंगलों में बहुत से जानवर रहते हैं. यहां के नदी नालों से हमें साफ़ पानी मिलता है. लोग मनोरंजन के लिए भी जंगलों में जाते हैं. जंगल के पेड़ मिट्टी का क्षरण रोकते हैं और ये हवा में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड सोखने में भी मदद करते हैं."
वैसे, सिर्फ़ आग लगने का पूर्वानुमान लगाने में ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद नहीं ली जा रही है. एक और क़ुदरती आपदा यानी बाढ़ रोकने के लिए भी ये काफ़ी मददगार साबित हो रहे हैं.
बाढ़ आने की कई वजहें होती हैं. भारी बारिश होना, ज़मीन का बेतहाशा इस्तेमाल, पानी निकासी का सही इंतज़ाम न होने से लेकर पानी के संसाधनों का सही इस्तेमाल न होने जैसे बहुत से कारण हैं जो बाढ़ आने की वजह बनते हैं.
दुनिया में तमाम वैज्ञानिक बाढ़ की चेतावनी जारी करने के मॉडल पर लगातार काम कर रहे हैं.
अमरीका के यूटा सूबे की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के माइकल सूफ्रोंट ऐसे ही एक वैज्ञानिक हैं. वो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर के दुनिया के तमाम देशों में आने वाली बाढ़ का सटीक पूर्वानुमान लगाना चाहते हैं, ताकि नुक़सान कम से कम हो.
इसके लिए वो बाढ़ का अंदाज़ लगाने वाले मौजूदा मॉडल में छोटी और सहायक नदियों के आंकड़े जोड़ रहे हैं. माइकल मानते हैं कि अक्सर इन्हीं नदियों से बाढ़ आने की शुरुआत होती है. छोटी से छोटी धारा और नदी का आकलन करके नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं. इससे शहरों और गांवों की बेहतर हिफ़ाज़त हो सकेगी.
दिसंबर 2015 में ब्रिटेन के लीड्स शहर में भयंकर बाढ़ आई थी. ये वहां के इतिहास में दर्ज रिकॉर्ड बाढ़ थी. इसके बाद बैम नटाल नाम की कंपनी को बाढ़ से हिफ़ाज़त के लिए बांध बनाने का काम दिया गया.
कैलिफ़ोर्निया में 2018 में आग लगने की 8527 घटनाएं हुई थीं. इसकी सीधा असर 18 लाख, 93 हज़ार 913 एकड़ ज़मीन पर असर पड़ा था. आग की वजह से कैलिफ़ोर्निया के पैराडाइज़ क़स्बे में 86 लोगों की मौत हो गई.
जंगल में भयंकर आग लगने का शिकार सिर्फ़ अमरीका का कैलिफ़ोर्निया सूबा हुआ हो, ऐसा नहीं है. 2018 में यूनान के समुद्र तट से लेकर ऑस्ट्रेलिया के जंगलों और ब्रिटेन तक जंगल की आग भड़की थी. यहां तक कि आर्कटिक जैसे सर्द इलाक़े में भी आग भड़क उठी थी.
आग लगने की इन घटनाओं को जलवायु परिवर्तन का नतीजा बताया जा रहा है. अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि आगे चलकर इंसानी सभ्यता ऐसी और भी घटनाओं के शिकार होंगे. ऐसे हालात से निपटने में हमें आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मदद कर सकता है.
तेज़ी से भड़की आग को क़ाबू करना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इस काम में सिर्फ़ जानकारों की मदद से आसानी नहीं होगी. इसीलिए आग का दायरा बढ़ने से रोकने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है.
अमरीका के सैन फ्रांसिस्को की कंपनी सिल्वियाटेरा इसी काम में लगी है. सिल्वियाटेरा मशीनी अक़्ल की मदद से जंगलों की मैपिंग करती है और संसाधनों को मुहैया कराती है, ताकि जंगल की आग से नुक़सान को कम से कम किया जा सके.
कंपनी की अधिकारी नैन पॉन्ड बताती हैं कि, "हम रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट से ज़मीनी आंकड़े जुटाते हैं. फिर इनकी मदद से आग भड़कने के पूर्वानुमान लगाते हैं."
जंगलों के विस्तार का आकलन
नैन पॉन्ड की टीम सैटेलाइट के अलावा ड्रोन और हेलीकॉप्टर से ली गई तस्वीरों के आधार पर भी जंगलों के विस्तार का आकलन करती है. इलाक़े में पाए जाने वाले पेड़-पौधों के आधार पर ये अंदाज़ा लगाया जाता है कि आग कितनी तेज़ी से और कितने बड़े इलाक़े में फैले सकती है.
सिल्वियाटेरा इस वक़्त अमरीका के 30 करोड़ हेक्टेयर इलाक़े में फैले जंगलों से जुड़े आंकड़े जुटा रही है. जब ये नक़्शा तैयार हो जाएगा, तो मशीन की मदद से आग के ज़्यादा जोखिम वाले इलाक़े की पहचान की जाएगी.
जोखिम का अंदाज़ा किसी ख़ास हिस्से में पाये जाने वाले पेड़-पौधों और झाड़ियों की क़िस्म, उनके घनत्व और जलने की क्षमता का आकलन कर के लगाया जाता है.
चीड़ जैसे कुछ पेड़ होते हैं, जो ज़्यादा जल्दी आग पकड़ लेते हैं. जंगल के पेड़-पौधों के आग पकड़ने की आशंका का अनुमान लगाने में उनकी मोटी छाल से लेकर दरख़्तों में मौजूद तेल का अनुपात तक असर डालता है. पत्तियां कितनी घनी हैं, ये बात भी आग के फैलने में काफ़ी मायने रखती है.
इससे पहले होता ये था कि जंगल में कुछ पेड़ों के नमूने लेकर अंदाज़न ये तय किया जाता था कि किस इलाक़े में आग तेज़ी से फैलेगी और किस जगह इसका असर कम पड़ेगा.
मगर, अब आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसका सटीक अनुमान लगाया जा सकता है. सिल्वियाटेरा जैसी कंपनियां जंगलों को लेकर सच्चाई के बेहद क़रीब पहुंच पाने वाले आंकड़े जुटा रही हैं.
ऐसे आंकड़ों की मदद से ही कैलिफ़ोर्निया के पैराडाइज़ इलाक़े में किस तरह आग तेज़ फैलेगी और किधर धीमी गति से बढ़ेगी, ये पता लगाया जा सका है. ज़्यादा जोखिम वाले इलाक़ों को नक़्शे में लाल रंग से चिह्नित किया जाता है. वहां पर आग रोकने के ज़्यादा पुख़्ता इंतज़ाम किए जाते हैं. हालांकि ये काम बहुत पेचीदा है.
थ्री डी मॉडल की मदद
नैन पॉन्ड कहती हैं, "हमें ये भी देखना पड़ता है कि जंगल से हमें कितने संसाधन मिलते हैं. जंगलों में बहुत से जानवर रहते हैं. यहां के नदी नालों से हमें साफ़ पानी मिलता है. लोग मनोरंजन के लिए भी जंगलों में जाते हैं. जंगल के पेड़ मिट्टी का क्षरण रोकते हैं और ये हवा में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड सोखने में भी मदद करते हैं."
वैसे, सिर्फ़ आग लगने का पूर्वानुमान लगाने में ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद नहीं ली जा रही है. एक और क़ुदरती आपदा यानी बाढ़ रोकने के लिए भी ये काफ़ी मददगार साबित हो रहे हैं.
बाढ़ आने की कई वजहें होती हैं. भारी बारिश होना, ज़मीन का बेतहाशा इस्तेमाल, पानी निकासी का सही इंतज़ाम न होने से लेकर पानी के संसाधनों का सही इस्तेमाल न होने जैसे बहुत से कारण हैं जो बाढ़ आने की वजह बनते हैं.
दुनिया में तमाम वैज्ञानिक बाढ़ की चेतावनी जारी करने के मॉडल पर लगातार काम कर रहे हैं.
अमरीका के यूटा सूबे की ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के माइकल सूफ्रोंट ऐसे ही एक वैज्ञानिक हैं. वो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर के दुनिया के तमाम देशों में आने वाली बाढ़ का सटीक पूर्वानुमान लगाना चाहते हैं, ताकि नुक़सान कम से कम हो.
इसके लिए वो बाढ़ का अंदाज़ लगाने वाले मौजूदा मॉडल में छोटी और सहायक नदियों के आंकड़े जोड़ रहे हैं. माइकल मानते हैं कि अक्सर इन्हीं नदियों से बाढ़ आने की शुरुआत होती है. छोटी से छोटी धारा और नदी का आकलन करके नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं. इससे शहरों और गांवों की बेहतर हिफ़ाज़त हो सकेगी.
दिसंबर 2015 में ब्रिटेन के लीड्स शहर में भयंकर बाढ़ आई थी. ये वहां के इतिहास में दर्ज रिकॉर्ड बाढ़ थी. इसके बाद बैम नटाल नाम की कंपनी को बाढ़ से हिफ़ाज़त के लिए बांध बनाने का काम दिया गया.
Thursday, February 28, 2019
पुलवामा पर डोजियर: अब दुनिया देखेगी PAK के आतंकी मंसूबों का सच
पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले को लेकर तैयार डोजियर भारत ने पाकिस्तान को सौंप दिया है. 14 फरवरी को पुलवामा में हमले को कैसे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया था, इसके सभी सबूत डोजियर में हैं. यह डोजियर पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को सौंपा गया.
डोजियर में बताया गया है कि कैसे पुलवामा हमले की योजना पाकिस्तानी की धरती पर जैश ने बनाई थी. आत्मघाती हमलावर आदिल डार का एक वीडियो जिसमें वह हमले के बारे में बात करता है वह भी डोजियर का हिस्सा है.
वीडियो में डार को जैश के एक आतंकी में रूप में दिखाया जा रहा है जिसमें वह हमले के बारे में बात कर रहा है. जो यह साबित कर रहा है इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था.
सूत्रों के मुताबिक डोजियर में आतंकवादी कामरान की फोन से हुई बातचीत भी शामिल है. बता दें कि कामरान जैश का आतंकी था जो पुलवामा हमले के बाद एक मुठभेड़ में मारा गिराया गया था. इससे साफ है कि वह पुलवामा हमले से पहले पाकिस्तान में जैश के हैंडलर्स के साथ संपर्क में था.
हमले में इस्तेमाल की गई कार के मालिक सज्जाद बट्ट की भी जानकारी है. जैश द्वारा सज्जाद का एक पोस्टर जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि वह उसी फिदायीन इकाई में शामिल हुआ था जिसने पुलवामा हमले को अंजाम दिया था. जैश ने हमले की योजना कैसे बनाई इसका विवरण भी सबूत के रूप में डोजियर में उल्लेख किया गया है.
पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त हुए थे तलब
पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. इससे एक दिन पहले ही भारत ने जैश ए मोहम्मद के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया था.
मंगलवार तड़के बालाकोट में भारत की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के 300 आतंकियों के मारे जाने की संभावना है. जैश ए मोहम्मद ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में 40 सीआरपीएफ कर्मचारी मारे गए थे.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व द्वारा उनके नियंत्रण वाली भूमि में आतंकवादियों की आतंकी आधारभूत सुविधाओं की मौजूदगी से निरंतर नकार पर खेद व्यक्त किया गया है .
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को यह अवगत कराया गया है कि भारत उम्मीद करता है कि पाकिस्तान उसके नियंत्रण वाली भूमि से उपजने वाले आतंकवाद के खिलाफ फौरन और पुष्टि की जा सकने योग्य कार्रवाई करेगा.
डोजियर में बताया गया है कि कैसे पुलवामा हमले की योजना पाकिस्तानी की धरती पर जैश ने बनाई थी. आत्मघाती हमलावर आदिल डार का एक वीडियो जिसमें वह हमले के बारे में बात करता है वह भी डोजियर का हिस्सा है.
वीडियो में डार को जैश के एक आतंकी में रूप में दिखाया जा रहा है जिसमें वह हमले के बारे में बात कर रहा है. जो यह साबित कर रहा है इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था.
सूत्रों के मुताबिक डोजियर में आतंकवादी कामरान की फोन से हुई बातचीत भी शामिल है. बता दें कि कामरान जैश का आतंकी था जो पुलवामा हमले के बाद एक मुठभेड़ में मारा गिराया गया था. इससे साफ है कि वह पुलवामा हमले से पहले पाकिस्तान में जैश के हैंडलर्स के साथ संपर्क में था.
हमले में इस्तेमाल की गई कार के मालिक सज्जाद बट्ट की भी जानकारी है. जैश द्वारा सज्जाद का एक पोस्टर जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि वह उसी फिदायीन इकाई में शामिल हुआ था जिसने पुलवामा हमले को अंजाम दिया था. जैश ने हमले की योजना कैसे बनाई इसका विवरण भी सबूत के रूप में डोजियर में उल्लेख किया गया है.
पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त हुए थे तलब
पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. इससे एक दिन पहले ही भारत ने जैश ए मोहम्मद के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया था.
मंगलवार तड़के बालाकोट में भारत की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के 300 आतंकियों के मारे जाने की संभावना है. जैश ए मोहम्मद ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में 40 सीआरपीएफ कर्मचारी मारे गए थे.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व द्वारा उनके नियंत्रण वाली भूमि में आतंकवादियों की आतंकी आधारभूत सुविधाओं की मौजूदगी से निरंतर नकार पर खेद व्यक्त किया गया है .
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को यह अवगत कराया गया है कि भारत उम्मीद करता है कि पाकिस्तान उसके नियंत्रण वाली भूमि से उपजने वाले आतंकवाद के खिलाफ फौरन और पुष्टि की जा सकने योग्य कार्रवाई करेगा.
Wednesday, January 30, 2019
वर्ल्ड कप से पहले अब सिर्फ 7 मैच, फील्डिंग कोच श्रीधर ने दिया बड़ा बयान
भारत के फील्डिंग कोच आर. श्रीधर को उम्मीद है कि अगले कुछ वनडे मैचों में रिजर्व खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिलेगा, क्योंकि टीम प्रबंधन चाहता है कि इस साल होने वाले आईसीसी के 50 ओवरों के विश्व कप से पहले सभी खिलाड़ी मैच खेलने के लिए तैयार रहें.
फील्डिंग कोच श्रीधर खुश हैं कि टीम तैयार है और गेंदबाजी आक्रमण काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. श्रीधर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ गुरुवार को हेमिल्टन में होने वाले चौथे वनडे मैच से पूर्व कहा, ‘जीत ऐसी आदत है, जिसे आप जारी रखना चाहते हैं और जोश को कम नहीं होने देना चाहते, लेकिन हमें रिजर्व खिलाड़ियों को भी मैच खेलने का मौका देना होगा, क्योंकि विश्व कप से पहले सिर्फ सात मैच बचे हैं.’
52 साल में पहली बार न्यूजीलैंड में जीत का चौका लगाने उतरेगा भारत
अधिकांश समय स्थिति के अनुसार पहली पसंद वाली अंतिम एकादश लगभग तय होती है और दबाव की स्थिति में जब रिजर्व खिलाड़ी उतरते हैं, तो मैच नहीं खेलने के कारण वे लय में नजर नहीं आते.
श्रीधर ने कहा, ‘हम विश्व कप के लिए जाने से पहले ऐसी स्थिति नहीं चाहते जहां मुख्य एकादश खेलती रहे और विश्व कप में जब अचानक अहम मैच खेलना हो, तो रिजर्व खिलाड़ी मैच खेलने का पर्याप्त समय नहीं मिलने के कारण इसके लिए तैयार नहीं हों. मुझे यकीन है कि टीम प्रबंधन भी इस बारे में सोच रहा है.’
हैदराबाद के इस पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर का मानना है कि इंग्लैंड की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत को तैयारी के लिए न्यूजीलैंड से बेहतर हालात नहीं मिल सकते. श्रीधर ने कहा, ‘जून में इंग्लैंड में जैसे हालात होंगे उसके अभ्यास के लिए न्यूजीलैंड से बेहतर जगह नहीं हो सकती. इसलिए निश्चित तौर पर हम ऐसी स्थिति तैयार करना चाहते हैं, जहां हम अपने रिजर्व खिलाड़ियों को खेलने का मौका दें.’
मौजूदा सत्र में भारत ने दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अब न्यूजीलैंड में वनडे सीरीज जीती है और इस दौरान टीम को सिर्फ इंग्लैंड में हार का सामना करना पड़ा. क्षेत्ररक्षण कोच का मानना है कि अनुभव और गेंदबाजी इकाई का प्रदर्शन दो पहलू हैं, जिसने अंतर पैदा किया.
चोटिल धोनी पर सस्पेंस, गिल को मिल सकता है मौका
श्रीधर ने कहा, ‘भारत की बल्लेबाजी हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन अब गेंदबाजों ने भी मैच के विभिन्न चरण में विकेट लेना शुरू कर दिया है. वे भुवी (भुवनेश्वर कुमार) और (मोहम्मद) शमी हों या लेग स्पिनर (कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल), उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और अब यहां ऐसा किया है.’
उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (कुलदीप और चहल) 24-25 मैचों में मिलकर संभवत: 100 विकेट हासिल किए हैं, जो शानदार है. खेल के सबसे महत्वपूर्ण चरण का ध्यान रखा जा रहा है. इसके बाद हमारे पास भुवी और (जसप्रीत) बुमराह के रूप में डेथ ओवरों के शानदार गेंदबाज हैं.’
फील्डिंग कोच श्रीधर खुश हैं कि टीम तैयार है और गेंदबाजी आक्रमण काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. श्रीधर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ गुरुवार को हेमिल्टन में होने वाले चौथे वनडे मैच से पूर्व कहा, ‘जीत ऐसी आदत है, जिसे आप जारी रखना चाहते हैं और जोश को कम नहीं होने देना चाहते, लेकिन हमें रिजर्व खिलाड़ियों को भी मैच खेलने का मौका देना होगा, क्योंकि विश्व कप से पहले सिर्फ सात मैच बचे हैं.’
52 साल में पहली बार न्यूजीलैंड में जीत का चौका लगाने उतरेगा भारत
अधिकांश समय स्थिति के अनुसार पहली पसंद वाली अंतिम एकादश लगभग तय होती है और दबाव की स्थिति में जब रिजर्व खिलाड़ी उतरते हैं, तो मैच नहीं खेलने के कारण वे लय में नजर नहीं आते.
श्रीधर ने कहा, ‘हम विश्व कप के लिए जाने से पहले ऐसी स्थिति नहीं चाहते जहां मुख्य एकादश खेलती रहे और विश्व कप में जब अचानक अहम मैच खेलना हो, तो रिजर्व खिलाड़ी मैच खेलने का पर्याप्त समय नहीं मिलने के कारण इसके लिए तैयार नहीं हों. मुझे यकीन है कि टीम प्रबंधन भी इस बारे में सोच रहा है.’
हैदराबाद के इस पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर का मानना है कि इंग्लैंड की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत को तैयारी के लिए न्यूजीलैंड से बेहतर हालात नहीं मिल सकते. श्रीधर ने कहा, ‘जून में इंग्लैंड में जैसे हालात होंगे उसके अभ्यास के लिए न्यूजीलैंड से बेहतर जगह नहीं हो सकती. इसलिए निश्चित तौर पर हम ऐसी स्थिति तैयार करना चाहते हैं, जहां हम अपने रिजर्व खिलाड़ियों को खेलने का मौका दें.’
मौजूदा सत्र में भारत ने दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अब न्यूजीलैंड में वनडे सीरीज जीती है और इस दौरान टीम को सिर्फ इंग्लैंड में हार का सामना करना पड़ा. क्षेत्ररक्षण कोच का मानना है कि अनुभव और गेंदबाजी इकाई का प्रदर्शन दो पहलू हैं, जिसने अंतर पैदा किया.
चोटिल धोनी पर सस्पेंस, गिल को मिल सकता है मौका
श्रीधर ने कहा, ‘भारत की बल्लेबाजी हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन अब गेंदबाजों ने भी मैच के विभिन्न चरण में विकेट लेना शुरू कर दिया है. वे भुवी (भुवनेश्वर कुमार) और (मोहम्मद) शमी हों या लेग स्पिनर (कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल), उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और अब यहां ऐसा किया है.’
उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (कुलदीप और चहल) 24-25 मैचों में मिलकर संभवत: 100 विकेट हासिल किए हैं, जो शानदार है. खेल के सबसे महत्वपूर्ण चरण का ध्यान रखा जा रहा है. इसके बाद हमारे पास भुवी और (जसप्रीत) बुमराह के रूप में डेथ ओवरों के शानदार गेंदबाज हैं.’
Tuesday, January 22, 2019
आईसीसी अवॉर्ड्स में विराट कोहली ने लगाई हैट्रिक
भारतीय कप्तान विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की ओर से दिए जाने वाले अवॉर्ड्स में छाए रहे.
विराट को पुरुष श्रेणी में क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर चुना गया है. साथ ही उन्हें टेस्ट और वनडे क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर भी चुना गया.
विराट को सर गारफ़ील्ड सोबर्स ट्रॉफ़ी से नवाज़ा गया है. यह ट्रॉफ़ी आईसीसी के पुरुष क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर को ही दी जाती है.
विराट कोहली यह तीनों ख़िताब एक साथ अपने नाम करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं.
विराट कोहली ने बीते साल क्रिकेट के तीनों फॉरमेट में कुल 47 पारियां खेली जिसमें उन्होंने दो हज़ार से ऊपर रन बनाए.
इसके साथ ही बीते साल उनके नाम कुल 11 शतक और नौ अर्धशतक भी शामिल हैं. वे दक्षिण अफ़्रीक़ा और इंग्लैंड दौरे में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी रहे थे.
विराट कोहली इस समय टेस्ट और वनडे में आईसीसी की बल्लेबाज़ी सूची में शीर्ष पर क़ाबिज़ हैं. साल 2018 में वे टेस्ट और वनडे दोनों फॉरमेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी रहे.
सर गारफ़ील्ड सोबर्स ट्रॉफ़ी में कोहली का सामना दक्षिण अफ़्रीक़ी गेंदबाज़ कगिसो रबाडा से था. रबाडा दूसरे स्थान पर रहे. वे आईसीसी टेस्ट प्लेयर के ख़िताब में भी दूसरे स्थान पर ही रहे.
वहीं वनडे प्लेयर ऑफ़ द ईयर में कोहली का सामना अफ़ग़ानिस्तान के खिलाड़ी राशिद ख़ान से था.
आईसीसी अवॉर्ड्स में तीन ख़िताब जीतने के बाद कोहली ने कहा, ''यह बहुत ही बेहतरीन पल हैं. मैंने सालभर जो मेहनत की यह उसका नतीजा है. आईसीसी अवॉर्ड्स में जब हमारा नाम आता है तो बहुत ख़ुशी होती है, एक खिलाड़ी के तौर पर हमें गर्व महसूस होता है.''
विराट कोहली को साल 2017 में भी सर गारफ़ील्ड सोबर्स ट्रॉफ़ी दी गई थी साथ ही उस साल उन्हें वनडे प्लेयर भी चुना गया था. इसके अलावा उन्हें साल 2012 में भी वनडे प्लेयर चुना जा चुका है.
आईसीसी की ओर से जारी टेस्ट टीम में भारतीय टीम के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत को भी जगह दी गई है.
तमाम बड़े नामों को पछाड़ते हुए 21 साल के इस युवा खिलाड़ी को टीम में विशेषज्ञ विकेटकीपर के तौर पर चुना गया है.
पंत को आईसीसी की ओर से साल 2018 का उभरता हुआ खिलाड़ी चुना गया है.
ग़ौर करने वाली बात है कि ऋषभ पंत ने इसी साल अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया. पंत ने अपने पहले मैच की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा था.
अभी तक उन्होंने भारतीय टीम के लिए 9 टेस्ट मैच ही खेले हैं. हाल ही में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था.
पंत के नाम टेस्ट में दो शतक हैं और ये दोनों ही शतक उन्होंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर बनाए हैं.
आईसीसी की साल 2018 की टेस्ट टीम में भी भारत का जलवा देखने को मिला है. भारत के कुल तीन खिलाड़ियों को इस टीम में चुना गया है.
विराट कोहली को टीम का कप्तान बनाया गया है. उनके अलावा ऋषभ पंत को विकेटकीपर के तौर पर और जसप्रीत बुमराह को तेज़ गेंदबाज़ के रूप में टीम में जगह मिली है.
इसके अलावा पाकिस्तान के मोहम्मद अब्बास को भी टेस्ट टीम में जगह मिली है. ऑस्ट्रेलिया के नाथन लियोन को भी टेस्ट टीम में एकमात्र स्पिनर के तौर पर जगह दी गई है.
वहीं वनडे टीम में चार भारतीय खिलाड़ियों को शामिल किया गया है. ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा को रखा गया है जबकि तीसरे नंबर पर विराट कोहली को रखा गया है, उन्हें ही टीम का कप्तान भी बनाया गया है.
इसके अलावा तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह और युवा स्पिनर कुलदीप यादव को भी वनडे टीम में रखा गया है.
इसके अलावा आईसीसी क्रिकेट स्पिरिट ऑफ़ द ईयर न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियमसन को दिया गया. फ़ैन मोमेंट के तौर पर भारत की अंडर-19 टीम के विश्व कप विजय के पल को दिया गया है. इसे 48 प्रतिशत मत दिए गए.
विराट को पुरुष श्रेणी में क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर चुना गया है. साथ ही उन्हें टेस्ट और वनडे क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर भी चुना गया.
विराट को सर गारफ़ील्ड सोबर्स ट्रॉफ़ी से नवाज़ा गया है. यह ट्रॉफ़ी आईसीसी के पुरुष क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर को ही दी जाती है.
विराट कोहली यह तीनों ख़िताब एक साथ अपने नाम करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं.
विराट कोहली ने बीते साल क्रिकेट के तीनों फॉरमेट में कुल 47 पारियां खेली जिसमें उन्होंने दो हज़ार से ऊपर रन बनाए.
इसके साथ ही बीते साल उनके नाम कुल 11 शतक और नौ अर्धशतक भी शामिल हैं. वे दक्षिण अफ़्रीक़ा और इंग्लैंड दौरे में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी रहे थे.
विराट कोहली इस समय टेस्ट और वनडे में आईसीसी की बल्लेबाज़ी सूची में शीर्ष पर क़ाबिज़ हैं. साल 2018 में वे टेस्ट और वनडे दोनों फॉरमेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी रहे.
सर गारफ़ील्ड सोबर्स ट्रॉफ़ी में कोहली का सामना दक्षिण अफ़्रीक़ी गेंदबाज़ कगिसो रबाडा से था. रबाडा दूसरे स्थान पर रहे. वे आईसीसी टेस्ट प्लेयर के ख़िताब में भी दूसरे स्थान पर ही रहे.
वहीं वनडे प्लेयर ऑफ़ द ईयर में कोहली का सामना अफ़ग़ानिस्तान के खिलाड़ी राशिद ख़ान से था.
आईसीसी अवॉर्ड्स में तीन ख़िताब जीतने के बाद कोहली ने कहा, ''यह बहुत ही बेहतरीन पल हैं. मैंने सालभर जो मेहनत की यह उसका नतीजा है. आईसीसी अवॉर्ड्स में जब हमारा नाम आता है तो बहुत ख़ुशी होती है, एक खिलाड़ी के तौर पर हमें गर्व महसूस होता है.''
विराट कोहली को साल 2017 में भी सर गारफ़ील्ड सोबर्स ट्रॉफ़ी दी गई थी साथ ही उस साल उन्हें वनडे प्लेयर भी चुना गया था. इसके अलावा उन्हें साल 2012 में भी वनडे प्लेयर चुना जा चुका है.
आईसीसी की ओर से जारी टेस्ट टीम में भारतीय टीम के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत को भी जगह दी गई है.
तमाम बड़े नामों को पछाड़ते हुए 21 साल के इस युवा खिलाड़ी को टीम में विशेषज्ञ विकेटकीपर के तौर पर चुना गया है.
पंत को आईसीसी की ओर से साल 2018 का उभरता हुआ खिलाड़ी चुना गया है.
ग़ौर करने वाली बात है कि ऋषभ पंत ने इसी साल अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया. पंत ने अपने पहले मैच की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा था.
अभी तक उन्होंने भारतीय टीम के लिए 9 टेस्ट मैच ही खेले हैं. हाल ही में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था.
पंत के नाम टेस्ट में दो शतक हैं और ये दोनों ही शतक उन्होंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर बनाए हैं.
आईसीसी की साल 2018 की टेस्ट टीम में भी भारत का जलवा देखने को मिला है. भारत के कुल तीन खिलाड़ियों को इस टीम में चुना गया है.
विराट कोहली को टीम का कप्तान बनाया गया है. उनके अलावा ऋषभ पंत को विकेटकीपर के तौर पर और जसप्रीत बुमराह को तेज़ गेंदबाज़ के रूप में टीम में जगह मिली है.
इसके अलावा पाकिस्तान के मोहम्मद अब्बास को भी टेस्ट टीम में जगह मिली है. ऑस्ट्रेलिया के नाथन लियोन को भी टेस्ट टीम में एकमात्र स्पिनर के तौर पर जगह दी गई है.
वहीं वनडे टीम में चार भारतीय खिलाड़ियों को शामिल किया गया है. ओपनर के तौर पर रोहित शर्मा को रखा गया है जबकि तीसरे नंबर पर विराट कोहली को रखा गया है, उन्हें ही टीम का कप्तान भी बनाया गया है.
इसके अलावा तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह और युवा स्पिनर कुलदीप यादव को भी वनडे टीम में रखा गया है.
इसके अलावा आईसीसी क्रिकेट स्पिरिट ऑफ़ द ईयर न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियमसन को दिया गया. फ़ैन मोमेंट के तौर पर भारत की अंडर-19 टीम के विश्व कप विजय के पल को दिया गया है. इसे 48 प्रतिशत मत दिए गए.
Thursday, January 10, 2019
कमलनाथ ने कहा- ये तो ट्रेलर है, अब भाजपा नेताओं के खुलासे होना शुरू होंगे: कमलनाथ
मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि भाजपा सही तरीके से विपक्ष की भूमिका नहीं निभा रही है। हम उनकी सच्चाई सबको बताएंगे। ये तो अभी ट्रेलर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बाद पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा वाले सुन ले कई मामलों के खुलासे होना अभी बाकी है। धीरे-धीरे 15 साल के कारनामे सामने आ जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव से पहले भाजपा ने विधायकों को खरीदने की कोशिश की। हमने उनसे सदन की परंपराओं को निभाने कहा। लेकिन उनका रुख ठीक नहीं रहा। वो अभी भी अपने आपको सत्ता में हैं ये समझ रहे हैं। हमारे बारे में ये कहा जा रहा है कि हम अल्पमत में है।
विपक्ष का रुख ठीक नहीं: कमलनाथ ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं था। ये तो संबैधामिक परंपराएं है हो जाती हैं। जिस तरह से विपक्ष ने जिस तरह का रुख अख्तियार किया उससे में आहत हूं। अगर विपक्ष अध्यक्ष के चुनाव के समय हमारा सहयोग करता तो हम उपाध्यक्ष का पद उन्हें दे देते। लेकिन उनका रुख सदन शुरू होने से पहले ही सकारात्मक नहीं था।
हम बेहतर काम करना चाहते है: कमलनाथ ने कहा कि हम विपक्ष के सहयोग से बेहतर काम करना चाहते हैं। मध्यप्रदेश को एक नया मॉडल देना चाहते है। भाजपा ने सदन की प्रकिया का पालन नही किया। परंपराएं टूटी है, हमें इस बात का दुख है। लेकिन शुरुआत भाजपा ने की। फूट डालने की मंशा के साथ बाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन भरा। उन्होंने कहा कि यह चुनाव कोई विधायक के चुनाव की तरह नही जिसमें जनता की वोटिंग की जाए। सदन में बैठे लोग ही इसका फैसला करते है। अगर इस मामले में भाजपा कोर्ट जाना चाहती है तो जा सकती है।
खुलासे होंगे: भाजपा को वोटिंग से डर था कि बहुत सारे खुलासे ना हो जाएं। अभी बहुत सारे ख़ुलासे होंगे। भाजपा को हमने वोटिंग का ऑफर दिया, लेकिन वो वोटिंग चाहते ही नही थे। हमने नियम का पूरी तरह से पालन किया। मध्यप्रदेश के विकास का काम करना हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौतियां है। विपक्ष के साथ मिलकर काम करने का हमेशा प्रयास रहेगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की बैठक में प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा बैठक से बाहर किए जाने पर विभाग के उपसचिव नियाज अहमद खान ने ट्वीट कर अपना दुख जाहिर किया है। उन्होंने ट्वीट किया है कि खान सरनेम का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है, ये भूत की तरह मेरे पीछे लगा है। सत्रह साल की नौकरी में उनके दस जिलों में उन्नीस बार ट्रांसफर हुए हैं। खान सरनेम होने के कारण उनसे ऐसा व्यवहार हुआ है। एक साल से उन्हें सरकारी मकान तक आवंटित नहीं हुआ है।
नियाज अहमद खान अब तक पांच पुस्तकें लिख चुके हैं। नियाज अहमद अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम और बॉलीवुड अदाकारा मोनिका बेदी की लव स्टोरी के दफन राज नाबेल काफी चर्चा में रहा था। उन्होंने तीन तलाक पर भी उपन्यास लिखा था। इसके बाद मुस्लिम समाज में भी उनका विरोध हुआ था। नियाज का कहना है कि वे अब अपने ऊपर छठा नाबेल लिखेंगे, जिसमें उनके साथ सरकारी नौकरी में जो हुआ उसका खुलासा करेंगे। गुना में ओडीएफ घोटाला उजागर करने के बाद शिवराज सरकार ने उन्हें मंत्रालय में पदस्थ कर दिया था।
पीएस ने उपसचिव नियाज से बैठक में कहा- 'गेट आउट' : पीएचई की बैठक में बुधवार को अधिकारी उस समय सकते में आ गए, जब प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल ने उपसचिव नियाज अहमद को वहां से निकल जाने के लिए कह दिया। अहमद ने इसकी शिकायत मुख्य सचिव से की है। मंत्रालय में पीएचई की समय सीमा बैठक थी। इसमें अग्रवाल के साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इस दौरान पीएस ने अहमद से एक जानकारी के बारे में जवाब तलब किया। अहमद ने बताया कि विभागाध्यक्ष से जानकारी मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। इस पर पीएस ने पूछा कैसे मांगी, जवाब मिला कि फोन पर बात की थी। इसे लेकर दोनों के बीच गर्मागर्म बहस हुई और अग्रवाल ने अहमद को 'गेट आउट' कहते हुए बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया। इसके बाद अहमद उठे और बैठक छोड़कर चले गए।
मैं उनके साथ काम नहीं करना चाहता : अहमद ने पत्र लिखकर पीएस की शिकायत सीएस से की है। उन्होंने अग्रवाल के साथ काम करने में असमर्थता जताई है। अहमद का कहना है कि पीएस हमेशा अभद्रता करते हैं। आज भी उन्होंने मेरे साथ अभद्रता की। मैं उनके साथ काम नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि सवा साल से मेरे साथ भेदभाव हो रहा है। मुझे मकान तक अलॉट नहीं किया गया।
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा वाले सुन ले कई मामलों के खुलासे होना अभी बाकी है। धीरे-धीरे 15 साल के कारनामे सामने आ जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव से पहले भाजपा ने विधायकों को खरीदने की कोशिश की। हमने उनसे सदन की परंपराओं को निभाने कहा। लेकिन उनका रुख ठीक नहीं रहा। वो अभी भी अपने आपको सत्ता में हैं ये समझ रहे हैं। हमारे बारे में ये कहा जा रहा है कि हम अल्पमत में है।
विपक्ष का रुख ठीक नहीं: कमलनाथ ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं था। ये तो संबैधामिक परंपराएं है हो जाती हैं। जिस तरह से विपक्ष ने जिस तरह का रुख अख्तियार किया उससे में आहत हूं। अगर विपक्ष अध्यक्ष के चुनाव के समय हमारा सहयोग करता तो हम उपाध्यक्ष का पद उन्हें दे देते। लेकिन उनका रुख सदन शुरू होने से पहले ही सकारात्मक नहीं था।
हम बेहतर काम करना चाहते है: कमलनाथ ने कहा कि हम विपक्ष के सहयोग से बेहतर काम करना चाहते हैं। मध्यप्रदेश को एक नया मॉडल देना चाहते है। भाजपा ने सदन की प्रकिया का पालन नही किया। परंपराएं टूटी है, हमें इस बात का दुख है। लेकिन शुरुआत भाजपा ने की। फूट डालने की मंशा के साथ बाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन भरा। उन्होंने कहा कि यह चुनाव कोई विधायक के चुनाव की तरह नही जिसमें जनता की वोटिंग की जाए। सदन में बैठे लोग ही इसका फैसला करते है। अगर इस मामले में भाजपा कोर्ट जाना चाहती है तो जा सकती है।
खुलासे होंगे: भाजपा को वोटिंग से डर था कि बहुत सारे खुलासे ना हो जाएं। अभी बहुत सारे ख़ुलासे होंगे। भाजपा को हमने वोटिंग का ऑफर दिया, लेकिन वो वोटिंग चाहते ही नही थे। हमने नियम का पूरी तरह से पालन किया। मध्यप्रदेश के विकास का काम करना हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौतियां है। विपक्ष के साथ मिलकर काम करने का हमेशा प्रयास रहेगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की बैठक में प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा बैठक से बाहर किए जाने पर विभाग के उपसचिव नियाज अहमद खान ने ट्वीट कर अपना दुख जाहिर किया है। उन्होंने ट्वीट किया है कि खान सरनेम का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है, ये भूत की तरह मेरे पीछे लगा है। सत्रह साल की नौकरी में उनके दस जिलों में उन्नीस बार ट्रांसफर हुए हैं। खान सरनेम होने के कारण उनसे ऐसा व्यवहार हुआ है। एक साल से उन्हें सरकारी मकान तक आवंटित नहीं हुआ है।
नियाज अहमद खान अब तक पांच पुस्तकें लिख चुके हैं। नियाज अहमद अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम और बॉलीवुड अदाकारा मोनिका बेदी की लव स्टोरी के दफन राज नाबेल काफी चर्चा में रहा था। उन्होंने तीन तलाक पर भी उपन्यास लिखा था। इसके बाद मुस्लिम समाज में भी उनका विरोध हुआ था। नियाज का कहना है कि वे अब अपने ऊपर छठा नाबेल लिखेंगे, जिसमें उनके साथ सरकारी नौकरी में जो हुआ उसका खुलासा करेंगे। गुना में ओडीएफ घोटाला उजागर करने के बाद शिवराज सरकार ने उन्हें मंत्रालय में पदस्थ कर दिया था।
पीएस ने उपसचिव नियाज से बैठक में कहा- 'गेट आउट' : पीएचई की बैठक में बुधवार को अधिकारी उस समय सकते में आ गए, जब प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल ने उपसचिव नियाज अहमद को वहां से निकल जाने के लिए कह दिया। अहमद ने इसकी शिकायत मुख्य सचिव से की है। मंत्रालय में पीएचई की समय सीमा बैठक थी। इसमें अग्रवाल के साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इस दौरान पीएस ने अहमद से एक जानकारी के बारे में जवाब तलब किया। अहमद ने बताया कि विभागाध्यक्ष से जानकारी मांगी थी, लेकिन नहीं मिली। इस पर पीएस ने पूछा कैसे मांगी, जवाब मिला कि फोन पर बात की थी। इसे लेकर दोनों के बीच गर्मागर्म बहस हुई और अग्रवाल ने अहमद को 'गेट आउट' कहते हुए बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया। इसके बाद अहमद उठे और बैठक छोड़कर चले गए।
मैं उनके साथ काम नहीं करना चाहता : अहमद ने पत्र लिखकर पीएस की शिकायत सीएस से की है। उन्होंने अग्रवाल के साथ काम करने में असमर्थता जताई है। अहमद का कहना है कि पीएस हमेशा अभद्रता करते हैं। आज भी उन्होंने मेरे साथ अभद्रता की। मैं उनके साथ काम नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि सवा साल से मेरे साथ भेदभाव हो रहा है। मुझे मकान तक अलॉट नहीं किया गया।
Thursday, January 3, 2019
अब पुलिस बैंड की धुन पर होगा वंदेमातरम्, मार्च भी निकाला जाएगा
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फैसला किया है कि मध्यप्रदेश में पुलिस बैंड की धुन पर वंदेमातरम् होगा। इसके अलावा हर महीने के पहले कार्य दिवस पर सुबह 10:45 बजे पुलिस बैंड की धुन पर शौर्य स्मारक से वल्लभ भवन तक मार्च निकाला जाएगा। पुलिस बैंड के वल्लभ भवन पहुंचने पर राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ और राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ होगा। कार्यक्रम में आम लोग भी शामिल किए जाएंगे।
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद एक जनवरी को वंदेमातरम् का गायन नहीं हुआ था। इसे लेकर विवाद शुरू हो गया था। रोक लगने 24 घंटे बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसे कांग्रेस का शर्मनाक कदम बताया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्यप्रदेश को तुष्टिकरण का केंद्र बना रही है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल से पूछा था कि क्या वंदेमातरम् पर रोक का फैसला आपका है?
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा...
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि वंदेमातरम् गायन पर कांग्रेस सरकार ने जनदबाव में निर्णय ले लिया है, लेकिन ये सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि #वंदेमातरम् रोकने के पीछे राहुल गांधी की मंशा थी या खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ का निर्णय? इसका जवाब प्रदेश को मिलना ही चाहिए। मेरा मध्यप्रदेश सब देख रहा है।
उन्होंने कहा कि हम सभी 7 जनवरी को मंत्रालय परिसर में वंदेमातरम् का गायन करेंगे। आप सभी इसमें अवश्य शामिल हों। हमारी नजर अगले महीने की एक तारीख पर भी बनी रहेगी। कांग्रेस को समझना होगा कि वंदेमातरम् दलीय राजनीति से ऊपर है। सरकारों के आने-जाने से इसे प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
कमलनाथ ने कहा था- बड़े पैमाने पर होगा वंदेमातरम
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को कहा था कि वंदेमातरम अब बड़े पैमाने पर होगा। शाह के बयान पर उन्होंने कहा था- ‘आजादी की लड़ाई के दौरान वंदेमातरम् गीत का अर्थ था, भारत मां को ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्त कराना। उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद भारत मां की वंदना का अर्थ है, किसानों की खुशियां, जो मैं कर्जमाफी और फसलों के दाम सुनिश्चित करके कर रहा हूं। सही अर्थों में मप्र की वंदना में लगा हूं। वंदेमातरम् कर रहा हूं।'
भाजपा विधायकों ने गाया वंदेमातरम
भोपाल में बुधवार को भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्रनाथ सिंह के नेतृत्व में विधायक विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा समेत अन्य नेताओं ने मंत्रालय पहुंचकर वंदेमातरम् गाया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा था कि विधानसभा सत्र के पहले दिन 7 जनवरी को सभी विधायक सुबह 10 बजे पहले मंत्रालय के सामने मैदान में वंदेमातरम् का गायन करेंगे।
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद एक जनवरी को वंदेमातरम् का गायन नहीं हुआ था। इसे लेकर विवाद शुरू हो गया था। रोक लगने 24 घंटे बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसे कांग्रेस का शर्मनाक कदम बताया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्यप्रदेश को तुष्टिकरण का केंद्र बना रही है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल से पूछा था कि क्या वंदेमातरम् पर रोक का फैसला आपका है?
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा...
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि वंदेमातरम् गायन पर कांग्रेस सरकार ने जनदबाव में निर्णय ले लिया है, लेकिन ये सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि #वंदेमातरम् रोकने के पीछे राहुल गांधी की मंशा थी या खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ का निर्णय? इसका जवाब प्रदेश को मिलना ही चाहिए। मेरा मध्यप्रदेश सब देख रहा है।
उन्होंने कहा कि हम सभी 7 जनवरी को मंत्रालय परिसर में वंदेमातरम् का गायन करेंगे। आप सभी इसमें अवश्य शामिल हों। हमारी नजर अगले महीने की एक तारीख पर भी बनी रहेगी। कांग्रेस को समझना होगा कि वंदेमातरम् दलीय राजनीति से ऊपर है। सरकारों के आने-जाने से इसे प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
कमलनाथ ने कहा था- बड़े पैमाने पर होगा वंदेमातरम
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को कहा था कि वंदेमातरम अब बड़े पैमाने पर होगा। शाह के बयान पर उन्होंने कहा था- ‘आजादी की लड़ाई के दौरान वंदेमातरम् गीत का अर्थ था, भारत मां को ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्त कराना। उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद भारत मां की वंदना का अर्थ है, किसानों की खुशियां, जो मैं कर्जमाफी और फसलों के दाम सुनिश्चित करके कर रहा हूं। सही अर्थों में मप्र की वंदना में लगा हूं। वंदेमातरम् कर रहा हूं।'
भाजपा विधायकों ने गाया वंदेमातरम
भोपाल में बुधवार को भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्रनाथ सिंह के नेतृत्व में विधायक विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा समेत अन्य नेताओं ने मंत्रालय पहुंचकर वंदेमातरम् गाया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा था कि विधानसभा सत्र के पहले दिन 7 जनवरी को सभी विधायक सुबह 10 बजे पहले मंत्रालय के सामने मैदान में वंदेमातरम् का गायन करेंगे।
Subscribe to:
Comments (Atom)